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एमपी विधानसभा में विधेयक पर चर्चा में उछाला गया नेहरू-मोदी और राहुल-नवाज का नाम, सत्तापक्ष-विपक्ष में हुई तीखी बहस

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
मध्य प्रदेश विधानसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-202.
मध्य प्रदेश विधानसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-202.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

भोपाल : जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर लगाम लगाने के मकसद से मध्य प्रदेश विधानसभा में ‘मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2021' के ध्वनिमत से पारित होने से पहले इस पर तीखी चर्चा हुई, जिसमें देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, कांग्रेस के नेता राहुल गांधी एवं संसद हमले के अभियुक्त अफजल गुरु के नाम उछाले गए. नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ की अनुपस्थिति में विपक्ष की ओर से चर्चा की अगुआई कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह ने इस विधेयक का विरोध किया.

उन्होंने कहा कि इसका कोई औचित्य नहीं है और न ही यह किसी के हित में है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक से व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं धर्म चुनने का अधिकार बाधित होता है और इसमें अल्पसंख्यक समाज को डराने, धमकाने एवं भयभीत करने की सरकार की मंशा साफ झलक रही है.

सिंह ने कहा कि इस विधेयक को उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड की सरकारों ने पारित कर दिया. इसलिए गृहमंत्री मिश्रा इसे (केन्द्रीय गृह मंत्री) अमित शाह की दरबार में वाहवाही लूटने के लिए लाए हैं. इस पर मिश्रा खड़े हुए और बोले, ‘जब जवाब बोलेंगे, तब तो आप मुझे सुनेंगे न.' मिश्रा ने कहा, ‘हमने तुष्टीकरण की राजनीति नहीं की. आज (भारत को) धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र कहना पड़ रहा है, जबकि इस देश का धर्म के आधार पर विभाजन हो गया. पाकिस्तान धर्म के नाम पर बन गया, तो हम धर्म निरपेक्ष क्यों बने रहें?'

उन्होंने कहा, ‘(पूर्व प्रधानमंत्री) नेहरू जी के कारण से तुष्टीकरण की राजनीति थी. इसलिए यह धर्म निरपेक्ष राष्ट्र हो गया.' इस पर कांग्रेस विधायक बृजेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि नेहरू अब नहीं हैं, इसलिए उनके नाम का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए. मिश्रा ने कहा, ‘जब गोविंद सिंह ने अमित शाह का नाम लिया, तो क्या मैंने कुछ कहा था? वह भी सदन में नहीं हैं.'

राठौर ने कहा, ‘इसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाए.' इस पर मिश्रा ने कहा, ‘जब अमित शाह का नाम लिया गया, आप तब भी बोलते कि इसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाए. अब आप पर आई, तो कह रहे है कि इसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाए.' गोविंद सिंह ने कहा कि रहने दीजिए, कोई बात नहीं है. राठौर ने कहा, ‘अब नेहरू जी जवाब देने तो आएंगे नहीं.'

इस पर मिश्रा ने कहा कि पूरी कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति करते हुए इस देश को आग में झोंका और भय की राजनीति इस देश में की. उन्होंने कहा कि एक विशेष वर्ग को निशाना बनाया गया और आज भी जो हो रहा है वह भ्रम और भय के कारण ही हो रहा है. अपनी बात को सही साबित करने के लिए उन्होंने कहा, ‘जेएनयू में ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्ला-इंशा अल्ला', ‘भारत की बर्बादी तक जंग हमारी जारी रहेगी', ‘अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं' और तुम कितने अफजल मारोगे, घर-घर से अफजल निकलेगा के नारे लगे.'

मिश्रा ने कहा, ‘अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं जिसने कहा, उनसे सबसे पहले मिलने कांग्रेस पार्टी के उस समय के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी गए थे. जो देश तोड़ने की बात करता है, यहीं से हमारा वैचारिक मतभेद है.' इस पर कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने कहा कि (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी भी तो (पाकिस्तान के पूर्व मुख्यमंत्री) नवाज शरीफ को मिलने गए थे.

कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहा, ‘पाकिस्तान कौन गया बिरयानी खाने?' कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना ने कहा कि मोदी भी नवाज शरीफ से मिलने गए थे. मिश्रा ने कहा, ‘तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर-घर से अफजल निकलेगा', तो हमने कहा, हम घर में घुस कर मारेंगे जिस घर में अफजल निकलेगा.' इस पर सत्तापक्ष के विधायकों ने मेजें थपथपाई और बाद में ‘मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2021' ध्वनिमत से पारित हो गया.

इस विधेयक में शादी तथा किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए धर्मांतरण के मामले में अधिकतम 10 साल कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जो नौ जनवरी, 2020 को अधिसूचित ‘मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश-2020' की जगह लेगा.

Posted by : Vishwat Sen

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