Chitrakoot Flood: तन के कपड़ों के अलावा सब बह गया, पीड़ित बोले- 2003 से भी भयावह बाढ़

Chitrakoot Flood: चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान ने लोगों की जिंदगी को बेपटरी कर दिया है. कहीं घर डूबे हैं तो कहीं दुकानें और अनाज बर्बाद हो गए हैं. कई परिवारों के पशु बह गए और लोग बेघर हो गए. पीड़ितों का कहना है कि इस बार की बाढ़ 2003 से भी ज्यादा भयावह रही.

हालात बेहद दयनीय हैं. रामघाट को हनुमान धारा से जोड़ने वाला पुल टूट गया है. करवी पुल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. स्थिति बहुत खराब है. लोगों की बकरियां, गायें और भैंसें बह गई हैं. बच्चों की नोटबुक और किताबें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं. धान और गेहूं जैसे उनके अनाज भी बर्बाद हो गए हैं— मनोज, स्थानीय निवासी

Chitrakoot Flood: यह दर्द अकेले मनोज का नहीं है. मध्य प्रदेश के चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित किसी भी इलाके में जाएं तो लोगों के पास सुनाने के लिए ऐसी ही दर्दभरी कहानी है. मंदाकिनी नदी के उफान ने घरों, दुकानों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. कई लोग बेघर हो गए हैं और अब अपने बचे-खुचे सामान के साथ जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं.

मंदाकिनी के उफान ने मचाई तबाही

मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई. रामघाट समेत आसपास के कई इलाके पानी में डूब गए. बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी सड़कों और गलियों में कीचड़ और गाद जमा है, जिससे लोगों का चलना तक मुश्किल हो रहा है. रामघाट को हनुमान धारा से जोड़ने वाला पुल टूट गया है, जबकि करवी पुल को भी भारी नुकसान पहुंचा है. आसपास के कई गांवों में लोगों के घर, अनाज और पशुधन बर्बाद हो गए हैं.

स्थानीय निवासी ने क्या कहा- बकरियां, गाय-भैंस सब बह गईं

स्थानीय निवासी मनोज कुमार ने बताया कि मलखाना, डेलोरा और गोबरिया जैसे गांवों में भी हालात बेहद खराब हैं. कई परिवारों की बकरियां, गाय और भैंसें बाढ़ में बह गईं. बच्चों की किताबें और कॉपियां पानी में खराब हो गईं, जबकि घरों में रखा धान और गेहूं भी बर्बाद हो गया. मनोज के मुताबिक सफाई का काम चल रहा है, लेकिन कई परिवारों के सामने अभी भी खाने और पीने के पानी की समस्या है.

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मेरे पास सिर्फ वही कपड़े बचे हैं जो पहने हैं- स्थानीय निवासी

एक अन्य स्थानीय निवासी सुरेश पाल ने बाढ़ से हुई तबाही का दर्द बयां करते हुए कहा कि उनका लगभग सब कुछ बह गया है.

पास में अब सिर्फ वही कपड़े बचे हैं, जो पहन रखे थे. जो थोड़ा-बहुत सामान बच पाया है, उसे लेकर परिवार छत पर खुले में रहने को मजबूर है. सड़कों पर कीचड़ इतना ज्यादा है कि चलना भी मुश्किल हो रहा है- स्थानीय निवासी सुरेश पाल

सुरेश ने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसी बाढ़ पहले कभी नहीं देखी.

सुरेश ने कहा- 2003 की बाढ़ से डेढ़ गुना ज्यादा भयानक

सुरेश पाल ने बताया कि इस बार की बाढ़ 2003 में आई बाढ़ से भी कहीं ज्यादा भयानक रही. उन्होंने इसे 2003 की बाढ़ से करीब डेढ़ गुना ज्यादा खतरनाक बताया. उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान उनका परिवार दो दिनों तक छत पर फंसा रहा. हालात ऐसे थे कि नाव भी उन तक नहीं पहुंच पा रही थी. उस समय उन्हें लग रहा था कि शायद अगले दिन तक कुछ भी नहीं बचेगा.

घरों और दुकानों में भरा कीचड़

बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब चित्रकूट के कई इलाकों में कीचड़ और गाद सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है. सड़कें, घर और दुकानें गंदगी से भरे हैं. सतना प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और सफाई अभियान शुरू कर दिया है. स्मार्ट सिटी सतना और नगर निगम की टीमें सड़कों से गाद हटाने में जुटी हैं. सफाईकर्मी और दमकल विभाग के कर्मचारी भी बुनियादी सेवाएं बहाल करने का काम कर रहे हैं.

350 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू

जिला प्रशासन के मुताबिक सतना जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों से 350 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. एसडीआरएफ की टीमें अभी भी बचाव अभियान चला रही हैं. प्रभावित लोगों तक टैंकरों के जरिए पीने का पानी और भोजन पहुंचाया जा रहा है. प्रशासन ने बढ़ते जलस्तर वाले संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से अस्थायी राहत शिविरों में जाने की अपील की है.

अब राहत और मुआवजे की उम्मीद

बाढ़ का पानी भले ही कई जगहों पर कम हो रहा हो, लेकिन लोगों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं. किसी का घर टूटा है तो किसी का कारोबार खत्म हो गया. कई परिवारों के पशु, अनाज और रोजमर्रा का सामान बह गया है. अब बाढ़ प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीद सरकारी मदद, राहत सामग्री और मुआवजे पर टिकी है.

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लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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