पश्चिमी सिंहभूम के पोड़ाहाट जंगल में सुरक्षा बलों की नक्सलियों से मुठभेड़, दो नक्सली ढेर

Naxal Encounter: पश्चिमी सिंहभूम के पोड़ाहाट जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. सोनुआ के केड़ाबीर इलाके में दो नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है. कोबरा, सीआरपीएफ और जिला पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर सर्च अभियान तेज कर दिया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

सोनुआ से राधेश सिंह, सूरज गुप्ता और संजय पांडेय की रिपोर्ट

Naxal Encounter: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत लोंजो के समीप केड़ाबीर जंगल में मंगलवार सुबह सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में दो नक्सलियों के मारे जाने की सूचना सामने आ रही है. हालांकि, पुलिस ने अभी आधिकारिक रूप से केवल मुठभेड़ की पुष्टि की है और विस्तृत जानकारी सर्च अभियान पूरा होने के बाद देने की बात कही है.

सुबह सात बजे से चल रहा अभियान

जानकारी के अनुसार, सुबह करीब सात बजे जंगल क्षेत्र में सुरक्षाबलों की टीम अभियान चला रही थी. इसी दौरान जंगल में छिपे नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी. जवाब में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की. दोनों ओर से कुछ देर तक गोलीबारी होती रही. इसके बाद नक्सली जंगल का फायदा उठाकर भागने की कोशिश करने लगे.

पुलिस कप्तान ने मुठभेड़ की पुष्टि की

पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए कहा कि सोनुआ थाना क्षेत्र के लोंजो-केड़ाबीर इलाके में सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है. फिलहाल पूरे इलाके को घेरकर सर्च अभियान चलाया जा रहा है. अभियान समाप्त होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कितने नक्सली मारे गए हैं और मौके से क्या बरामदगी हुई है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार इलाके में कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है. जंगल के कई हिस्सों को सील कर दिया गया है ताकि नक्सली भाग न सकें.

मिसिर बेसरा और सालुका कायम दस्ते की तलाश

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सारंडा क्षेत्र में लगातार बढ़ते दबाव के बाद कई बड़े नक्सली नेता पोड़ाहाट के जंगलों में शरण लिए हुए हैं. इनमें करोड़ों के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा के भी इलाके में सक्रिय होने की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को मिली थी. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर सक्रिय 10 लाख के इनामी नक्सली सालुका कायम और उसके दस्ते की मौजूदगी की भी खबर थी. इसी सूचना के आधार पर सुरक्षा बल लगातार इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे थे. माना जा रहा है कि मंगलवार को हुई मुठभेड़ उसी अभियान का हिस्सा थी. सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि मारे गए नक्सली किस दस्ते से जुड़े थे.

पूर्व नक्सली की हत्या के बाद बढ़ी थी सतर्कता

कुछ दिन पहले गोईलकेरा थाना क्षेत्र में पूर्व नक्सली रमेश चांपिया की हत्या के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां पहले से ही अलर्ट थीं. उस घटना के बाद संकेत मिले थे कि नक्सली संगठन सारंडा से निकलकर कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगल क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके में अभियान तेज कर दिया था. 29 अप्रैल को भी सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में एक लाख के इनामी नक्सली इसराइल पूर्ति उर्फ अमृत को मार गिराया था. उस कार्रवाई के बाद पुलिस अधिकारियों ने दावा किया था कि पश्चिमी सिंहभूम और आसपास के जंगलों में सक्रिय नक्सलियों के खिलाफ जल्द और बड़ी कार्रवाई की जाएगी.

इसे भी पढ़ें: BCCL में नौकरी दिलाने के नाम पर 200 लोगों से 20 करोड़ की ठगी, धनबाद-बंगाल से जुड़ रहे तार

जंगलों में जारी है शह और मात का खेल

पोड़ाहाट और सारंडा के घने जंगल लंबे समय से नक्सलियों की गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माने जाते रहे हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों ने लगातार अभियान चलाकर कई बड़े नक्सली नेताओं को गिरफ्तार या ढेर किया है. इसके बावजूद जंगल क्षेत्रों में समय-समय पर नक्सलियों की गतिविधियां सामने आती रही हैं. फिलहाल, केड़ाबीर जंगल में सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी है. सुरक्षा एजेंसियां इलाके की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पोड़ाहाट और आसपास के इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज किया जा सकता है.

इसे भी पढ़ें: सेल में 11 करोड़ के फर्जी भुगतान का आरोप, पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा ने खोला मोर्चा

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >