अस्पताल के बेड फुल, जमीन पर हो रहा है बच्चों का इलाज

पेयजल नहीं मिलने के कारण लोग चुआं व गंदे जगहों का पानी पीने को हैं विवश अधिकांश बच्चों में टाइफायड की शिकायत चाईबासा : अमूमन बारिश में अपने पांव पसारने वाली वाटर बॉर्न डिजीज (जलजनित बीमारी) गर्मी के इस मौसम में पांव पसराने लगी है. इसका मुख्य वजह पेयजल की किल्लत बतायी जा रही है. […]

पेयजल नहीं मिलने के कारण लोग चुआं व गंदे जगहों का पानी पीने को हैं विवश

अधिकांश बच्चों में टाइफायड की शिकायत
चाईबासा : अमूमन बारिश में अपने पांव पसारने वाली वाटर बॉर्न डिजीज (जलजनित बीमारी) गर्मी के इस मौसम में पांव पसराने लगी है. इसका मुख्य वजह पेयजल की किल्लत बतायी जा रही है. पेयजल नहीं मिलने के कारण लोग चुआं व गंदे जगहों का पानी पीने को विवश है. इस बीमारी से सबसे ज्यादा छोटे बच्चे प्रभावित हो रहे हैं. सदर अस्पताल स्थित मालन्यूट्रिशन ट्रीटमेंट सेंटर(एमटीसी) में इस बीमारी से ग्रसित होकर आने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है. एमटीसी में जनवरी से लेकर अब तक के आंकड़ों पर एक नजर डाला जाये तो बेड की संख्या
से अधिक बच्चे आ चुके हैं. मुख्यत: बच्चों में पानी से उत्पन्न बीमारियों क्रमश: टाइफायड, दस्त, उल्टी, पेट दर्द आदि की समस्या पायी जा रही हैं. इन वाटर बॉर्न डिजीज के प्रमुख कारण बैक्टिरियल, पैरासाइटिक, वायरल होते हैं. सदर प्रखंड के अलावा चक्रधरपुर, झींकपानी, हाटगम्हरिया, खूंटपानी, सोनुवा, बंदगांव, मनोहरपुर से भी बच्चे आ रहे हैं. जिनमें टाइफायड की शिकायत अधिक है.
बच्चों में वाटर बॉर्न डिजीज के मामले बढ़े
गंदे पानी पीने की वजह से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं. बच्चों में अधिकतर टाइफायड की शिकायत पायी गयी है. तथा एक और अन्य वजह है कि अब लोगों में जागरुकता आ रही है. वे घर में ओझा से झाड़ फूंक करवाने की बजाय अब अस्पताल आ रहे हैं.
डॉ जगन्नाथ हेंब्रम,शिशु रोग विशेषज्ञ, एमटीसी

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