मनोज कुमार
चाईबासा : लापता बच्चों को खोज निकालने के लिए पश्चिमी सिंहभूम में ऑपरेशन मुस्कान चलाया जायेगा. इस ऑपरेशन के तहत देश के कोने-कोने से लापता बच्चों को खोजकर, उनके परिजनों को सौंपा जायेगा. जिन बच्चों के परिजन नहीं मिलेंगे, उनके लिए पुनर्वास की भी इस ऑपरेशन में व्यवस्था की गयी है. ऐसे बच्चों को पुनर्वास के तहत बनाये गये आवास में रखे जायेंगे या नया आवास बनाकर उनको आश्रय दिया जायेगा.
सीआइडी निभायेगी अहम रोल
सीआइडी का इस ऑपरेशन में अहम रोल होगा. सीआइडी अपने स्तर से पता लगायेगी कि गुम हुए बच्चे फिलहाल कहां है. उनको कहां रखा गया है. उनसे क्या करवाया जा रहा है. ये सूचना सीआइडी पुलिस को देगी. पुलिस उस पर आगे अमल करेगी. सीआइडी को इस ऑपरेशन का नोडल एजेंसी बनाया गया है.
नक्सलियों के पास हैं कई बच्चे
सीआइडी ने पुलिस मुख्यालय को खबर दी है कि लापता बच्चों में से कई बच्चे नक्सलियों के पास हैं. नक्सली इनसे खाना बनवाने, बरतन धुलवाने का कार्य कर रहे हैं. इस ऑपरेशन के माध्यम से पुलिस नक्सलियों के पास किसी तरह पहुंचे बच्चों तक भी अपनी दबिश बढ़ायेगी. नक्सलियों से बच्चों को छुड़ाने की कवायद होगी.
1098 से जुड़ेंगे सभी हेल्प लाइन
गुमशुदा बच्चों की सूचना देने या बरामदगी की खबर के लिए सरकार की ओर से बनाये गये सभी हेल्प नंबर को 1098 से जोड़ा जायेगा. इसके अलावा गुमशुदा बच्चों की बरामदगी या सूचना के लिए जितने भी साइट हैं, उनको भारत सरकार के ट्रैक द चाइल्ड वेबपोर्टल से जोड़ा जायेगा. इससे अन्य साइटों की सूचना ट्रैक द चाइल्ड वेबपोर्टल पर भी आ जायेगी और बच्चों को आसानी से रिकवर किया जा सकेगा.
लापता बच्चों का आंकड़ा नहीं
जिले से लापता बच्चों का कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है. प्राथमिकी भी थाने में दर्ज नहीं है. चाईबासा के अहातु थाना में एक साल में महज चार मामले ही दर्ज किये गये हैं. तीन साल में लगभग 350 बच्चों को रिकवर किया गया है. बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष विकास दोदराजका का कहना है कि इस जिले से लगभग पांच हजार से भी अधिक बच्चे ट्रेफिकिंग के शिकार हुए हैं.
