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सारंडा के कोलायबुरु-कुमडीह गांव में घटिया सड़क निर्माण की खुली पोल, उखड़ने लगी परत

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
निर्माणाधीन कोलायबुरु-कुमडीह सड़क का खास्ता हाल. निर्माण के साथ ही उखड़ने लगी सड़क में लगे कोलतार.
निर्माणाधीन कोलायबुरु-कुमडीह सड़क का खास्ता हाल. निर्माण के साथ ही उखड़ने लगी सड़क में लगे कोलतार.
प्रभात खबर.

Jharkhand News (किरीबुरु/पश्चिमी सिंहभूम), रिपोर्ट- शैलेश सिंह : पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत सारंडा क्षेत्र के कोलायबुरु-कुमडीह गांव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क में घटिया निर्माण की पोल खुलने लगी है. कोलायबुरु में करीब साढ़े बारह किलोमीटर लंबी और कुमडीह गांव में करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी पीसीसी सड़क निर्माण में घटिया कार्य हुआ है. यही कारण है कि सड़क बनने के कुछ दिन बाद ही ये सड़कें उखड़ने लगी है.

नक्सल प्रभावित सारंडा के कोलायबुरु से कुमडीह गांव तक पीसीसी सड़क निर्माण का कार्य आरोहण कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया गया. करीब 14 किलोमीटर तक बनी सड़क का हाल खास्ता है. घटिया निर्माण होने से ग्रामीणों में काफी गुस्सा है. सारंडा के कुदलीबाद, कोलायबुरु, बहदा, कुमडीह आदि गांव के ग्रामीणों ने घटिया सड़क निर्माण का आरोप लगाया है. ग्रामीणों ने संबंधित ठेकेदार से घटिया सड़क निर्माण होने की शिकायत की, लेकिन स्थिति सुधारने की बजाय ग्रामीणों को ही धमकाया जा रहा है.

करीब 14 किलोमीटर सड़क निर्माण में अनियमितता को लेकर बहदा के मुंडा रोया सिधु, कुमडीह के वार्ड सदस्य सागर बिरुवा समेत अन्य ग्रामीणों ने पथ निर्माण विभाग समेत राज्य सरकार पर इसकी मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित सारंडा में घटिया स्तर का सड़क निर्माण विकास में बाधा उत्पन्न कर रही है.

ग्रामीणों का आरोप है कि घटिया सड़क निर्माण का आलम देखिए कि साइकिल का ब्रेक मारते ही सड़क उखड़ जाती है. इसके बावजूद ना तो कभी संबंधित विभाग के अधिकारी इसकी जांच करने यहां आते हैं और ना ही जिला प्रशासन इस ओर गंभीर दिखती है. घटिया सड़क निर्माण को लेकर अब तक कोई जांच नहीं होने से इसका लाभ बखूबी ठेकेदार उठा रहे हैं.

इस सड़क निर्माण में लगे ठेकेदार ग्रामीणों से भी धोखा कर रहे हैं. गांव के मछुआ चांपिया के खेत में बालू-गिट्टी डंप किया गया और इसके एवज में हर दिन 1200 रुपये देने को कहा था. डेढ़ साल बीत गये, लेकिन मछुआ चांपिया को मात्र दो हजार रुपये ही दिये गये. इसके अलावा गांव के गुणा मांझी के खेत में मुरूम रखा गया. इस मुरुम का उपयोग सड़क निर्माण में किया, लेकिन खेत को आज तक समतल नहीं किया गया.

इधर, कोलायबुरु-कुमडीह सड़क बनने के साथ-साथ उखड़ने और गड्ढें में तब्दील भी होती जा रही है. सड़क पर इतना पतला परत कोलतार और गिट्टी का दिया जा रहा है, ताकि नीचे का मोटा गिट्टी और पत्थर पूरे सड़क में दिखाई दे रहा है. इतना ही नहीं गिट्टी पत्थर को छुपाने के लिए अलकतरा मिक्स बालू का छिड़काव ऊपर से किया जा रहा है. सड़क किनारे बनाये जा रहे गार्डवाल में सारंडा जंगल या नदी के पत्थरों से अवैध तरीके से जोड़ाई की जा रही है. कुमडीह गांव में बना पीसीसी सड़क का निर्माण भी घटिया स्तर का हुआ है.

सड़क एवं गार्डवाल निर्माण में लगे बहदा गांव के मजदूर गुरा चांपिया, सुनिया चांपिया, लालसाय चांपिया और सुकराम चांपिया ने बताया कि ठेकेदार द्वारा काम तो कराया गया है, लेकिन अबतक मजदूरी नहीं दी है. करीब 20 दिनों से अपनी मजदूरी मांगी जा रहा है, लेकिन ठेकेदार पैसा नहीं दे रहा है.

उल्लेखनीय है कि सारंडा के विभिन्न क्षेत्रों में अशोक प्रधान द्वारा कई सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है. लेकिन, ये सड़कें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने लगी है. दूसरी ओर, सांसद गीता कोड़ा ने भी सरकार समेत जिला प्रशासन पर ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को सड़कों के निर्माण का ठेका देने का आराेप लगाया है. उन्होंने जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग राज्य सरकार से की है.

Posted By : Samir Ranjan.

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