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झारखंड में आम के पेड़ के नीचे क्यों पढ़ रहे सरकारी स्कूल के बच्चे, तेज धूप होने पर बैरंग लौट जाते हैं घर

शिक्षिका किरण गुप्ता ने बताया कि स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण विभाग ने तोड़वा दिया गया. नया भवन बनाने के लिए राशि आयी है. ठेकेदार की मनमानी के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand News: आम के पेड़ के नीचे क्लास कर रहे बच्चे
Jharkhand News: आम के पेड़ के नीचे क्लास कर रहे बच्चे
प्रभात खबर

Jharkhand News: झारखंड में तमाम दावे-वादों के बीच सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल नहीं रही है. करोड़ों खर्च के बावजूद सरकारी स्कूलों के बच्चों को मूलभूत सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो रही हैं. पश्चिमी सिंहभूम जिले के हाटगम्हरिया प्रखंड में एक सरकारी स्कूल के बच्चे आम के पेड़ के नीचे पढ़ाई करने पर मजबूर हैं. तेज धूप या बारिश होने पर वे बैरंग अपने घर लौट जाते हैं. जर्जर स्कूल की बिल्डिंग तोड़ने के बाद किराये के मकान में स्कूल चल रहा था, लेकिन एक कमरे में बच्चों को बैठाने में परेशानी होने पर इन्हें खुले में पढ़ाया जा रहा है.

तेज धूप या बारिश में लौट जाते हैं घर

पश्चिमी सिंहभूम जिले के हाटगम्हरिया प्रखंड के उत्क्रमित विद्यालय, जैरपी में बच्चों को पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. यहां पहली से पांचवीं तक कुल 60 बच्चे हैं. इसके पूर्व किराये के खपरैल मकान में पढ़ाई होती थी. सामने खटाल है. बच्चे अधिक होने के कारण एक कमरा में बैठाकर पढ़ाना मुश्किल हो रहा था. इस कारण पेड़ के नीचे बैठाकर इन्हें पढ़ाया जा रहा है. तेज धूप होने या बारिश होने पर बच्चों को घर लौट जाना पड़ता है.

ठेकेदार की मनमानी से पढ़ाई प्रभावित

शिक्षिका किरण गुप्ता ने बताया कि स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण विभाग ने तोड़वा दिया गया. नया भवन बनाने के लिए राशि आयी है. ठेकेदार की मनमानी के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है. कई बार स्कूल निर्माण को लेकर ठेकेदार को कहा गया, लेकिन विभाग भी चुप्पी साधे हुए है. बच्चों की पढ़ाई में काफी असुविधा हो रही है.

आम के पेड़ के नीचे पढ़ाई

बरसात में फर्श पर तिरपाल बिछाकर बैठाना पड़ता है. अब गर्मी में मकान में बच्चों को बैठाने में काफी दिक्कत हो रही है. ऐसे में आम के पेड़ के नीचे तिरपाल बिछाकर बैठाया जा रहा है. शिक्षिका ने बताया कि विद्यालय के भवन निर्माण के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक गुहार लगायी गयी है. इसके बावजूद किसी ने बच्चों की सुध नहीं ली.

रिपोर्ट: देवेंद्र

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