सिमडेगा से रविकांत साहू की रिपोर्ट
Chaiti Chhath: सिमडेगा में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ रविवार को नहाय-खाय के साथ विधिवत शुरू हो गया. चार दिनों तक चलने वाला यह कठिन व्रत भगवान सूर्य की उपासना को समर्पित होता है, जिसमें व्रती कठोर नियमों का पालन करते हैं. इस बार इस महापर्व की खास बात यह है कि सिमडेगा की उपायुक्त कंचन सिंह भी इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ कर रही हैं.
ड्यूटी के साथ निभा रहीं आस्था की जिम्मेदारी
डीसी कंचन सिंह प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ छठ महापर्व की आस्था में भी पूरी तरह सराबोर नजर आ रही हैं. उन्होंने स्वयं गेहूं सुखाकर और शुद्ध सात्विक भोजन तैयार कर नहाय-खाय का अनुष्ठान पूरा किया. यह दृश्य आम लोगों के लिए प्रेरणादायक है कि कैसे व्यस्त प्रशासनिक जीवन के बीच भी परंपराओं और आस्था को निभाया जा सकता है.
नहाय-खाय का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
चैती छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जो शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. इस दिन व्रती नदी, तालाब या अन्य पवित्र जल स्रोतों में स्नान कर अपने शरीर और मन को शुद्ध करते हैं. इसके बाद कद्दू, चना दाल और अरवा चावल से बने सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है. यह प्रक्रिया शरीर को डिटॉक्स करने और व्रत के लिए तैयार करने में भी मददगार मानी जाती है.
खरना के साथ शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत
महापर्व के दूसरे दिन यानी 23 मार्च को खरना पूजा की जाएगी. इस दिन व्रती पूरे दिन निराहार रहते हैं और शाम को पूजा के बाद गुड़ और दूध से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करते हैं. इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो छठ का सबसे कठिन चरण होता है. इस दौरान व्रती पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ उपवास रखते हैं.
अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य की परंपरा
चैती छठ के तीसरे दिन 24 मार्च को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे. यह दृश्य बेहद श्रद्धा और भक्ति से भरा होता है, जब श्रद्धालु जल में खड़े होकर सूर्य देव की पूजा करते हैं. इसके अगले दिन यानी 25 मार्च की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा. इसके साथ ही चार दिवसीय महापर्व का समापन हो जाएगा.
केलाघाघ डैम में तैयारियां तेज, उमड़ेगी भीड़
सिमडेगा शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित केलाघाघ डैम परिसर में छठ पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. हर वर्ष की तरह इस बार भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटेंगे. नगर परिषद द्वारा घाटों की साफ-सफाई कराई जा रही है और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
इसे भी पढ़ें: नहाय-खाय के साथ आज से शुरू हो गया चैती छठ महापर्व, मंगलवार को पहला अर्घ्य
आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आभार का पर्व
चैती छठ महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है. इस पर्व में व्रती परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं. साथ ही यह पर्व समाज में एकता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है.
इसे भी पढ़ें: रामनवमी से हनुमान जयंती तक झारखंड में स्पेशल अलर्ट, हजारीबाग अतिसंवेदनशील
