शचिंद्र कुमार दाश
Kharsawan News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड के लोसोदिकी गांव में झारखंड की फॉककल्चर को समर्पित झूमर नाइट का आयोजन किया गया. इस कल्चरल नाइट में फॉकडांस और गीतों की ऐसी छटा बिखरी कि पूरा गांव झूमता नजर आया. प्रोग्राम में सबसे खास आकर्षण का केंद्र लोकल विधायक दशरथ गागराई रहे, जिन्होंने मंच पर उतरकर खुद झूमर गाया. उन्होंने मांदर और ट्रेडिशनल म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट्स की थाप पर डांस भी किया.
विधायक के अंदर का आर्टिस्ट आया सामने
प्रोग्राम के दौरान विधायक दशरथ गागराई का एक अलग ही रूप देखने को मिला. आमतौर पर राजनीतिक मंचों पर नजर आने वाले विधायक जब फॉक आर्टिस्ट के साथ स्टेज शेयर करते दिखे, तो दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. उन्होंने मांदर, ढोल और दूसरे ट्रेडिशनल म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट्स की थाप पर झूमर पेश किया. विधायक दशरथ गागराई ने कुरमाली झूमर के साथ-साथ हो और ओड़िया समेत कई लैंग्वेज में गीत गाकर माहौल को पूरी तरह कल्चरल प्रोग्राम को रंगीला बना दिया.
झूमर किंग संतोष महतो ने बांधा समां
इस प्रोग्राम में स्पेशल तौर पर इनवाइट झूमर किंग संतोष महतो अपनी पूरी टीम के साथ प्रीजेंट रहे. संतोष महतो और उनके साथियों ने कुरमाली, खोरठा, नागपुरी और संबलपुरी लैंग्वेज में एक से बढ़कर एक झूमर गीत पेश किए. उनके फॉक सॉन्ग्स की मेलोडीज पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे. स्टेज से निकली धुनों ने पूरे इलाके को उत्सव में बदल दिया.
ट्रेडिशनल कॉस्ट्यूम्स और फॉक मेलोडीज ने बढ़ाई शोभा
प्रोग्राम में आर्टिस्ट ट्रेडिशनल कॉस्ट्यूम्स नजर आए, जिससे झूमर नाइट की सुंदरता और भी बढ़ गई. मांदर, ढोल, नगाड़ा और बांसुरी की धुनों ने माहौल को पूरी तरह आदिवासी और फॉक कल्चर से जोड़ दिया. छोटे बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी झूमर गीतों पर थिरकते दिखे.
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फॉक कल्चर के संरक्षण का मैसेज
झूमर नाइट के जरिए यह मैसेज भी दिया गया कि आधुनिक दौर में भी झारखंड की फॉक कल्चर, लैंग्वेज और ट्रेडिशन को सहेजना बेहद जरूरी है. विधायक दशरथ गागराई ने स्टेज से कहा कि ऐसे प्रोग्राम्स न्यू जेनरेशन को अपनी रूट्स से जोड़ने का काम करते हैं और फॉकआर्ट को जिंदा रखते हैं.
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