चड़क पूजा में निभायी जायेगी सभी धार्मिक परंपराएं, 9 से 14 अप्रैल तक होगी पूजा

खरसावां में चड़क पूजा का आयोजन नौ से 14 अप्रैल तक होगा. पारंपरिक घटयात्रा (कलशयात्रा) निकाली जायेगी. सरकारी खर्च से पूजा का आयोजन होगा.

खरसावां. खरसावां में चड़क पूजा का आयोजन नौ से 14 अप्रैल तक होगा. मौके पर पारंपरिक घटयात्रा (कलशयात्रा) निकाली जायेगी. नौ अप्रैल को शुभघट, 10 अप्रैल को मथाघट व दुर्गा मां की यात्राघट, 11 अप्रैल को वृंदावनी, 12 अप्रैल को शंकर जी का गरियाभार, 13 अप्रैल को रात्रि जागरण, 14 अप्रैल को मां काली की कालिका घट निकालने के बाद विसर्जन किया जायेगा. वृंदावनी घट रामगढ़ नदी से बाजारसाही के शिव मंदिर तक लायी जायेगी. जबकि अन्य पांच घटों को कुम्हारसाही स्थित सोना नदी से बाजारसाही स्थित शिव मंदिर तक लाया जायेगा.

सरकारी खर्च से होती है पूजा

खरसावां में चड़क पूजा का आयोजन सरकारी खर्च से होता है. जानकारी के अनुसार, चड़क पूजा पर करीब 40 हजार रुपये खर्च होते हैं. खरसावां में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए राज्य सरकार की ओर से राशि उपलब्ध करायी जाती है. इसमें चड़क पूजा भी एक है.

राजा-राजवाड़े के समय से हो रही पूजा

चड़क पूजा का आयोजन राजा-राजवाड़े के समय से होता आ रहा है. चड़क पूजा के दौरान शुभघट निकलने के बाद ही चैत्र पर्व का आयोजन होता है. मालूम हो कि आजादी से पूर्व राजा-राजवाड़े के समय चैत्र पर्व का आयोजन विशेष सरकारी कोष से होता था. 1947 में रियासतों के भारत गणराज्य में विलय के दौरान तत्कालीन राजा व सरकार के बीच हुए मर्जर एग्रीमेंट के बाद से ही चड़क पूजा समेत विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन सरकारी खर्च से होता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >