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World Environment Day 2021 : जंगल माफियाओं के खिलाफ झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन की मुहिम लाई रंग, सरायकेला के जंगलों में लौटी हरियाली

By Prabhat khabar Digital
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World Environment Day 2021 : जंगल माफियाओं के खिलाफ मुहिम से लौटी हरियाली
World Environment Day 2021 : जंगल माफियाओं के खिलाफ मुहिम से लौटी हरियाली
प्रभात खबर

World Environment Day 2021, खरसावां न्यूज (शचिंद्र कुमार दाश) : झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड में वनों को संरक्षित करने के लिये लोगों को झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन (झाजबआ) जागरुक कर रहा है. इसके सदस्य जंगलों को संरक्षित करने के साथ-साथ लोगों को वन संरक्षण के लिये भी प्रेरित कर रहे हैं. जंगल माफियाओं के खिलाफ इस आंदोलन की मुहिम रंग लाई और उजड़े जंगलों की हरियाली लौट आयी. आज ये जंगल स्थानीय लोगों के जीविकोपार्जन का जरिया भी बन गये हैं.

90 के दशक में एक दौर था, जब जंगल माफियाओं की आरी पहाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों को खत्म कर रही थी. तभी 1999 में झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन नामक संस्था का गठन कर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जंगल बचाने के लिये लोगों को जागरुक करने का कार्य शुरु किया गया था. समिति के राज्य संयोजक सोहन लाल कुम्हार लगातार पहाड़ी क्षेत्रों में बैठक कर लोगों को जंगल बचाने व संरक्षित करने के लिये प्रेरित करते रहे. साथ ही जंगल के घनत्व बढ़ने से मिलने वाले लाभ तथा जंगल समाप्त होने पर इसके विपरीत परिणाम से भी लोगों को आगाह करते रहे.

जंगल के संरक्षित होने के बाद ग्रामीणों को वनोपोज का लाभ मिला, तो जंगल बचाने की मुहिम में क्षेत्र के लोग भी जुड़ते चले गये. 22 साल पूर्व शुरु हुए इस कारवां से लोग जुड़ते गये और जंगल बचाने के प्रति लोगों में जागरुकता आयी. लोग अब ग्राम स्तर पर छोटी छोटी समितियों का गठन कर पेड़ों को संरक्षित करने लगे. फिलहाल कुचाई में बड़े पैमाने पर पेड़ों को संरक्षित किया गया है. रायसिंदरी की पाहाड़ी में वनों घनत्व काफी अधिक बढ़ गया है. जंगलों के संरक्षित होने से न सिर्फ दुर्लभ जड़ी बुटियां मिल रही हैं, बल्कि कई परिवार वनोपज (कुसुम, केंदु, महुआ, चिरौंजी समेत कई पहाड़ी फल) से अपना जीविकोपार्जन कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं.

सोहन लाल कुम्हार कहते हैं कि सिर्फ वन विभाग के भरोसे जंगल को नहीं बचाया जा सकता है. जंगल बचाने के लिये गांव के लोगों को ग्राम सभा के माध्यम से आगे आना होगा. सिर्फ पेड़ लगाने से नहीं चलेगा, उन्हें संरक्षित भी करना होगा. पेड़ लगाने से अधिक पेड़ बचाने पर ध्यान देना होगा.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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