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पद्मश्री दिगंबर हांसदा का निधन, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा व सीएम हेमंत सोरेन ने जताया शोक

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
 राष्ट्रपति से पद्मश्री लेते दिगंबर हांसदा
राष्ट्रपति से पद्मश्री लेते दिगंबर हांसदा
फाइल फोटो

सरायकेला (शचीन्द्र कुमार दाश) : पद्मश्री दिगंबर हांसदा का आज सुबह जमशेदपुर में निधन हो गया. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने जमशेदपुर के शिक्षाविद सह पद्मश्री दिगंबर हांसदा के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि पद्मश्री दिगंबर हांसदा के निधन की खबर सुनकर मर्माहत हूं. इन्होंने झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में वंचित समुदायों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए सराहनीय कार्य किया था. इसके लिए इन्हें हमेशा याद किया जायेगा.

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि उन्हें पद्मश्री दिगंबर हांसदा के सान्निध्य में रहने का अवसर मिला है. उन्होंने पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में वंचित समुदायों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए काम किया था. साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनका असाधारण योगदान रहा. आदिवासियों और उनकी भाषा के उत्थान के क्षेत्र में प्रोफेसर दिगंबर हांसदा का महत्वपूर्ण योगदान है.

दिगंबर हांसदा केन्द्र सरकार के आदिवासी अनुसंधान संस्थान के सदस्य रहे और उन्होंने सिलेबस की किताबों का देवनागरी से संताली में अनुवाद किया था. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि इसके अलावा राज्य सरकार के अधीन उन्होंने इंटरमीडिएट, स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए संताली भाषा का कोर्स संग्रहित किया था. अर्जुन मुंडा ने कहा कि दिवंगत आत्मा को भगवान अपने श्रीचरणों में स्थान दें. परिजनों को दुख सहने की शक्ति दें.

दिगंबर हांसदा लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर थे. वे जमशेदपुर के करनडीह के रहनेवाले थे. झारखंड के कल्याण मंत्री चम्पई सोरेन, पोटका विधायक संजीव सरदार एवं भाजपा के प्रवक्ता व पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने करनडीह पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री प्रो दिगंबर हांसदा के निधन पर गहरा दुःख व शोक प्रकट किया है. उन्होंने कहा कि प्रो हांसदा का साहित्य व शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान रहा है. वे जनजातीय भाषाओं के उत्थान के प्रति सदा सजग रहते थे. वर्ष 2017 से 2020 तक उन्होंने राज्यपाल द्वारा कोल्हान विश्वविद्यालय में मनोनीत सिंडिकेट सदस्य के रूप में सजगतापूर्वक कार्य किया था. राज्य के लिये ये भी गौरव की बात है कि वे संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में संथाली भाषा के परीक्षक हुआ करते थे. साहित्य अकादमी के सदस्य के रूप में कुशलतापूर्वक कार्य करने हेतु भी वे स्मरण में रहेंगे.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिक्षाविद पद्मश्री प्रो दिगम्बर हांसदा के निधन पर दुःख व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि संताली भाषा को विश्व पटल पर ले जाने में हांसदा जी का अभूतपूर्व योगदान रहा है. उनका निधन शिक्षा और साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. परमात्मा उनकी आत्मा को शांति प्रदान कर परिवार को दुःख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति दें.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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