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खरसावां में एक ही परिवार के 4 सदस्य दिव्यांग, नहीं मिलती सुविधा, सिर्फ मिलता है आश्वासन

झारखंड के खरसावां विधानसभा क्षेत्र के खूंटपानी प्रखंड प्रखंड के मटकोबेड़ा पंचायत के केंदूलोटा गांव के दुरु बानरा के परिवार के 4 सदस्य दिव्यांग है. लेकिन, परिवार के एक सदस्य को छोड़कर अन्य को सरकार की ओर से चलायी जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रही है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand News :  सांसद प्रतिनिधि के साथ अपना दिव्यांगता प्रमाण पत्र दिखाते दुरु बानरा के परिजन.
Jharkhand News : सांसद प्रतिनिधि के साथ अपना दिव्यांगता प्रमाण पत्र दिखाते दुरु बानरा के परिजन.
प्रभात खबर.

Jharkhand news (शचिंद्र कुमार दाश, खरसावां) : झारखंड के खरसावां विधानसभा क्षेत्र के खूंटपानी प्रखंड प्रखंड के मटकोबेड़ा पंचायत के केंदूलोटा गांव के दुरु बानरा के परिवार के 4 सदस्य दिव्यांग है. लेकिन, परिवार के एक सदस्य को छोड़कर अन्य को सरकार की ओर से चलायी जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रही है. सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के सांसद प्रतिनिधि अमित केशरी ने दुरु बानरा तथा उनके परिजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एसडीओ व बीडीओ से मिलकर आवेदन कराया. जल्द ही दुरु बानरा के परिवार के सरकारी योजना का लाभ देने का आश्वासन मिला है.

जानकारी के अनुसार, दुरु बानरा की पत्नी बेरेल बानरा (50 वर्ष), बेटी लुदरी बानरा (17 वर्ष), बेटा गुलिया बानरा (27 वर्ष) और घनश्याम बानरा (15 वर्ष) दिव्यांग है. दुरु बानरा ने बताया कि उसके दो बेटा और एक बेटी जन्म से ठीक थे. लेकिन, चार-पांच साल की उम्र में हाथ-पांव से दिव्यांग हो गये. दिव्यांग होने का कारण पता नहीं चल सका है.

आर्थिक रूप से कमजोर व जानकारी के अभाव में दुरु बानरा अपने बेटा-बेटी का इलाज किसी बड़े निजी अस्पताल में भी नहीं करवा सका. दुरु बानरा ने बताया कि उसकी पत्नी बेरेल बानरा पहले ठीक-ठाक थी. बाद में लकवा होने के कारण विकलांग हो गयी. अब वह भी बिना सहारा के नहीं चल पाती है. दुरु बानरा का बड़ा बेटा ठीक-ठाक है. शादी के बाद वह अपने पिता से अलग रहता है. ऐसे में पूरे परिवार के भरण-पोषण का जिम्मा 61 वर्षीय दुरु बानरा के ऊपर है.

एक को छोड़ अन्य सभी पेंशन योजना से है वंचित

दुरु बानरा के एक बेटा गुलिया बानरा को ही दिव्यांग पेंशन मिलता है, जबकि उसके दो दिव्यांग पुत्र-पुत्री और पत्नी को दिव्यांग पेंशन की स्वीकृति नहीं मिल पायी है. दुरु बानरा का बेटा घनश्याम बानरा-बेटी लुदरी बानरा का दिव्यांगता प्रमाण पत्र बना है, जिसमें 60 फिसदी दिव्यांगता बताया गया है.

61 वर्ष होने के बावजूद भी दुरु बानरा को अब तक वृद्धावस्था पेंशन नहीं स्वीकृत हुआ है. सरकारी सुविधा के नाम पर दुरु बानरा के परिवार को 30 किलो चावल मिलता है. साथ ही 7- 8 साल पहले उसके एक दिव्यांग बेटा को एक ट्राई साइकिल मिला था. दुरु बानरा के छोटा बेटा व बेटी के साथ-साथ पत्नी को अभी तक पेंशन नहीं मिला है.

सांसद प्रतिनिधि ने दिव्यांग पेंशन के लिए भरवाया आवेदन

दुरु बानरा के घर की हालात की जानकारी मिलने के बाद खरसावां के उप प्रमुख सह स्वास्थ्य विभाग के सांसद प्रतिनिधि अमित केशरी दुरु के घर पहुंच कर मामले की जानकारी ली. उन्होंने पूरे मामले से स्थानीय सांसद सह केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा को अवगत कराया. इसके बाद सोमवार को दुरु बानरा के लिए वृद्धावस्था पेंशन तथा उसके पुत्री लुदरी बानरा व पुत्र घनश्याम बानरा के लिए दिव्यांग पेंशन संबंधी फॉर्म भरवा कर चाईबासा के सदर एसडीओ शचिंद्र बड़ाईक के पास पहुंचे.

उन्होंने चाईबासा सदर एसडीओ को मामले की जानकारी देते हुए दुरु बानरा के परिवार के आवेदनों को स्वीकृति देने का आग्रह किया. बीडीओ सह सीओ रवि कुमार आनंद से मिल पेंशन की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए कागजी कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. अमित केशरी ने उम्मीद जताया कि जल्द ही दुरु बानरा का वृद्धावस्था पेंशन व उसके पुत्र-पुत्री का दिव्यांग पेंशन मिलना शुरू हो जायेगा. इस दौरान मुखिया सुदामा हाईबुरु, सुभाय पाडेया, सोंगा जारिका, पाइकराय बानरा, श्याम जारिका, जगाई बानरा आदि मौजूद थे.

एक सप्ताह के अंदर दिव्यांग पेंशन की मिल जायेगी स्वीकृति : एसडीओ

इस संबंध में चाईबासा सदर एसडीओ शशिंद्र बड़ाइक ने कहा कि कागजी प्रक्रिया पूरी कर एक सप्ताह के भीतर दिव्यांग पेंशन की स्वीकृति दे दी जायेगी. सभी कागजी प्रक्रिया पूरी कर अग्रतर कार्रवाई के लिए खूंटपानी सीओ को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया गया है. साथ ही अन्य सरकारी योजनाओं से भी लाभ दी जायेगी.

लुदरी और घनश्याम बानरा का बैंक में खुल गया खाता : बीडीओ

वहीं, खूंटपानी बीडीओ सह सीओ रवि कुमार आनंद ने कहा कि दुरु बानरा का वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन लिया गया है. वृद्धा पेंशन स्वीकृत किया जायेगा. लुदरी बानरा व घनश्याम बानरा का बैंक खाता नहीं होने के कारण दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल सका था. दोनों का बैंक में खाता खुल गया है. साथ ही आवेदन लेकर इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. एक-दो दिनों में दोनों का दिव्यांग पेंशन स्वीकृत हो जायेगा.

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