रोशनी से दूर करें मन का अंधेरा

By Prabhat Khabar Digital Desk
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सरायकेला-खरसावां : सरायकेला-खरसावां के विभिन्न पूजा पंडालों में मां काली की पूजा शनिवार की रात शुरू हो गयी. अधिकांश पूजा पंडालों के साथ-साथ मंदिरों में मां काली की पूजा अगले सात दिनों तक चलेगी.

खरसावां में मुख्य रूप से सरकारी काली मंदिर, पदमपुर काली मंदिर, पांचगछिया, महालिमुरुप, किता, बड़ाबांबो, बुढ़ीतोपा, आमदा में काली पूजा का आयोजन किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. खरसावां के अधिकांश पूजा पंडालों में तांत्रिक विधि से मां काली की पूजा हो रही है. वहीं बुढ़ीतोपा, आमदा रेलवे कॉलोनी, आमदा के ठाकुरबाड़ी पूजा पंडाल, पांचगछिया में वैष्णव विधि से मां काली की पूजा अर्चना हो रही है.

पदमपुर में मां काली पूजा 1897 से होती रही है, जबकि खरसावां के सरकारी काली मंदिर में तीन सौ वर्षो से माता की पूजा अर्चना हो रही है. बुढ़ीतोपा में मां काली की पूजा पिछले 49 वर्षो से होती रही है. सीनी बाजार का पूजा करीब 83 वर्षो से मां काली की पूजा होती रही है. सीनी बाजार के अलावा एकता काली मंदिर रेलवे कॉलोनी स्थित काली मंदिर में भी मां काली की पूजा धूमधाम से की जा रही है.

प्रसिद्ध पदमपुर काली मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मां काली पूजा को लेकर सीनी में भी उत्सव सा माहौल है. वहीं चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में काली पूजा धूमधाम से मनायी जा रही है. शनिवार की रात क्षेत्र के काली मंदिरों और बनाये गये पंडालों में देवी की पूजा में काफी संख्या में लोग शामिल हुए. चांडिल चौक बाजार, डैम रोड, भालुकोचा, स्टेशन बस्ती, चांडिल डैम रोड में बामनी जुडिया के निकट, चावलीबासा, जयदा समेत अनेक स्थानों पर आकर्षक पंडाल के साथ प्रतिमा स्थापित की गयी है.

राजनगर प्रखंड के राजनगर बाजार, तुमुंग, बड़ाकांकी, एदल, हेंसल, कुनाबेड़ा आदि स्थानों पर पंडाल निर्माण कर मां काली की प्रतिमा स्थापित की गयी है. शनिवार रात यहां विधिवत मां काली की पूजा की गयी है. इन स्थानों पर पंडाल का निर्माण कर पूजा की जा रही है. वहीं रविवार से ग्रामीण शहरी क्षेत्रों में बांदना पर्व शुरू हो जायेगा.

प्रखंड के कुनाबेड़ा एवं खंडाडेरा गांव में इस वर्ष भी देश बांदना का आयोजन किया गया है. नीमडीह प्रखंड के बाचकमकोचा गांव के ग्रामीणों ने गोट पूजा स्थल की साफ-सफाई की. ग्रामीण शेखर टुडू ने बताया कि सोमवार को गोट पूजा, मंगलवार को गोड़ा पूजा बुधवार को बांदना खुटान मनाया जायेगा. सोमवार की रात में सोहराय नृत्य प्रतियोगिता होगी, जिसके विजेता पुरस्कृत किये जायेंगे.

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