आंदोलन का असर बरकरार, दूसरे दिन भी पत्थर ढुलाई ठप, रेलवे की कमाई पर दिखा असर

साहिबगंज–पाकुड़ जिले के विकास से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं पत्थर व्यवसायी

साहिबगंज

साहिबगंज–पाकुड़ जिले के विकास से जुड़ी मांगों को लेकर पत्थर व्यवसायियों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी जारी रहा. आंदोलन के प्रभाव से रेलवे के माध्यम से होने वाली पत्थर रैक लोडिंग पूरी तरह ठप रही. इससे जिले के सभी प्रमुख मार्शलिंग यार्ड सुनसान नजर आए. पत्थर ढुलाई बंद रहने से रेलवे को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. पूर्व घोषित आंदोलन कार्यक्रम के तहत 16 जनवरी से पत्थर व्यवसायियों ने रैक लोडिंग नहीं करने का निर्णय लिया था. इस फैसले को साहिबगंज के साथ-साथ पाकुड़ जिले के पत्थर व्यवसायियों का भी पूर्ण समर्थन प्राप्त है. दोनों जिलों के व्यवसायी एकजुट होकर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक पत्थर ढुलाई शुरू नहीं की जाएगी.

मार्शलिंग यार्डों में पसरा सन्नाटा :

आंदोलन के दूसरे दिन भी मिर्जाचौकी, करमटोला, तालझारी, तीनपहाड़, धमधामिया, बाकुड़ी, बरहरवा सहित जिले के सभी बड़े मार्शलिंग यार्डों में सन्नाटा पसरा रहा. कई स्थानों पर रेलवे द्वारा खाली रैक भेजे जाने के बावजूद लोडिंग नहीं हो सकी, जिसके कारण रेलवे को खाली रैक वापस लौटाने पड़े. व्यवसायियों द्वारा पहले से लिए गए इंडेंट भी रद्द कर दिए गए हैं, जिससे रेलवे की परिचालन व्यवस्था प्रभावित हुई है.

रेलवे को रोज़ाना करोड़ों का नुकसान :

रेलवे सूत्रों के अनुसार, आंदोलन से पहले साहिबगंज क्षेत्र से प्रतिदिन औसतन 6 से 8 रैक पत्थर की लोडिंग होती थी. प्रत्येक रैक से रेलवे को करीब 20 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता था. अब रैक लोडिंग पूरी तरह बंद होने से रेलवे को प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपये तक के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है. यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो रेलवे की माल ढुलाई योजना और राजस्व लक्ष्य पर इसका सीधा असर पड़ेगा.

मजदूरों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट :

लगातार दूसरे दिन पत्थर ढुलाई बंद रहने से मिर्जाचौकी, करमटोला, तालझारी, तीनपहाड़, धमधामिया, बाकुड़ी और बरहरवा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा होने लगा है. स्थानीय स्तर पर इसका सामाजिक असर भी दिखायी देने लगा है. व्यवसायियों ने संकेत दिए हैं कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है, जिससे अन्य व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं. फिलहाल आंदोलन का असर बरकरार है और रेलवे तथा प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

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Published by: Abdhesh singh

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