साहिबगंज
किसानों की उम्मीदें और विभाग की चुनौतियां
जिले में सहकारिता समितियों की बढ़ती संख्या उत्साहजनक है, लेकिन कर्मचारियों की कमी बड़ी चुनौती बनकर सामने आयी है. किसान और मछुआरे सहकारिता से बड़ी उम्मीदें रखते हैं, पर विभाग में पद रिक्त रहने से उनकी अपेक्षाओं पर असर पड़ रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार समय रहते खाली पदों पर बहाली करे तो किसानों को आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि सहकारिता समितियों का संचालन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा.वर्षवार समिति गठन इस प्रकार रहा:
2022: 15 समितियां
2023: 25 समितियां2024: 11 समितियां
2025 (अब तक): 3 समितियांजिला कार्यालय की स्थिति
साहिबगंज सहकारिता विभाग के जिला कार्यालय में स्वीकृत पदों की तुलना में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति चिंताजनक है:
सहकारिता पदाधिकारी – 2 स्वीकृत, 2 कार्यरत सहायक – 3 स्वीकृत, 1 कार्यरतअनुसेवक – 2 स्वीकृत, 1 कार्यरत
चालक – 2 स्वीकृत, 0 कार्यरतसहायक निबंधक सहयोग समिति कार्यालय की स्थिति और भी खराब है:
सहायक निबंधक अधिकारी – 1 स्वीकृत, 0 कार्यरतसहरिकारिता प्रसार पदाधिकारी – 13 स्वीकृत, 4 कार्यरत
लिपिक – 3 स्वीकृत, 1 कार्यरतअनुसेवक – 3 स्वीकृत, 0 कार्यरत
कर्मचारियों की यह कमी विभाग की कार्यक्षमता पर सीधा असर डाल रही है. सहकारिता समितियों की संख्या बढ़ने के बावजूद, अगर विभाग में कर्मचारी उपलब्ध नहीं होंगे, तो किसानों को समय पर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना मुश्किल हो जायेगा. अधिकारी का क्या कहना है इस जिले में कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी है, लेकिन सरकारी कार्यों को निष्पादित करना हमारी जिम्मेदारी है. किसानों को हर संभव सहयोग देने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है. साथ ही सहकारिता समितियों के गठन के लिए प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है. “ महादेव मुर्मू, जिला सहकारिता पदाधिकारीकिसानों की उम्मीदें और विभाग की चुनौतियां
जिले में सहकारिता समितियों की बढ़ती संख्या उत्साहजनक है, लेकिन कर्मचारियों की कमी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है. किसान और मछुआरे सहकारिता से बड़ी उम्मीदें रखते हैं, पर विभाग में पद रिक्त रहने से उनकी अपेक्षाओं पर असर पड़ रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार समय रहते खाली पदों पर बहाली करे, तो न केवल किसानों को आर्थिक सहयोग मिलेगा बल्कि सहकारिता समितियों का संचालन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा.
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