हीरालाल पांडेय
जज्बा को जुनून का पंख मिल जाये, तो मंजिल दूर नहीं रहती. खेत में मेहनत की जाये, तो बंजर भूमि भी सोना उगलने लगती है. इसमें उम्र या गरीबी आड़े नहीं आती. बंजर भूमि पर सब्जी की खेती से अपना परिवार चला कर गोविंदपुर प्रखंड के खरनी पंचायत के बाबूडीह-अंकुरा निवासी भानु प्रसाद कुम्हार (70), ईश्वर कुम्हार (65) एवं कालाचंद कुम्हार (62) ने इसकी मिसाल पेश की है.
तीनों सगे भाई हैं और सरकारी नौकरी से रिटायर भानु प्रसाद की पहल पर खेतों में कड़ी मेहनत कर रहे हैं. भानु प्रसाद कुम्हार डीएसइ ऑफिस, धनबाद में कार्यरत थ़े उन्होंने बताया कि घर में तीनों भाई एक साथ रहते थ़े दो भाई बेरोजगार थ़े रिटायरमेंट के बाद संयुक्त परिवार चलाना कठिन हो गया था. फिर तीनों भाइयों ने संयुक्त रूप से अंकुरा पहाड़ी के समीप बंजर जमीन में खेती करने का निर्णय लिया. वहां कुल सात एकड़ रैयती जमीन थी. प्रयोग के तौर पर इस एक एकड़ जमीन में सब्जी की खेती शुरू की़
भानु बताते हैं कि बंजर भूमि में खेती शुरू की, तो लोगों ने इनकी खूब हंसी उड़ायी. लेकिन, तीनों भाइयों ने उनकी कोई परवाह नहीं की और अपने काम में लगे रहे. शुरुआत में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. पानी की कमी दूर करने के लिए डीप बोरिंग करायी. पानी का अच्छा लेयर मिल गया़ बोरिंग से इस बार की गरमी में भी प्रचुर मात्रा में पानी मिला. जो कल तक इनकी हंसी उड़ाते थे, अब वह भी सब्जी की खेती करने लगे हैं.
पानी की कमी है मुख्य समस्या : भानु ने बताया कि आसपास के क्षेत्रों में सरकार की ओर से पानी की व्यवस्था कर दी जाये, तो यहां के किसानों की कमाई बढ़ जायेगी. इससे गांव में बेरोजगारी की समस्या भी बहुत हद तक दूर हो जायेगी़ उन्होंने कहा कि आज उनकी पूरी जमीन पर सब्जी की खेती होती है. रोजाना थोक भाव में चार-पांच हजार रुपये की सब्जी बेच रहे हैं. घर के सभी लोग (महिला-पुरुष) खेती में हाथ बंटाते हैं.
खेती से पूरा इलाका हरा-भरा : लौकी, कोहड़ा, करेला, नेनुआ, भिंडी, झिंगा, टमाटर, भिंडी, मकई की खेती सात एकड़ जमीन में लगी हुई है़ इतनी बड़े क्षेत्र में खेती से पूरा इलाका हरा-भरा दिखता है़ इस उम्र में भी तीनों भाइयों का कठिन परिश्रम देख कर लोग चकित भी हैं और प्रेरित भी हो रहे हैं.
खेती से भाग रहे आज के युवा : विधायक
विधायक फूलचंद मंडल ने तीनों बुजुर्ग भाइयों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ग्रामीण इनसे सीख ल़ें ग्रामीण खेती में मन लगायें. हमारे पूर्वजों के पास नौकरी नहीं थी़ हमारे बुजुर्गों ने खेती करके ही हमलोगों को पढ़ा-लिखा कर आगे बढ़ाया़ कहा : आज के युवा खेती से भाग रहे हैं, जबकि सब्जी की खेती में अच्छी कमाई होती है. सरकार की ओर से किसानों को सहायता भी मिलती है़ गांव के युवक मिल कर संयुक्त रूप से खेती करें, तो मैं अपनी ओर सेयुवकों की हरसंभव मदद करूंगा़ खेती करनेवाले किसानों के लिए पानी की व्यवस्था कराऊंगा.
कुआं, तालाब व डोभा के लिए मिलेंगे पैसे
बीडीओ संजीव कुमार ने बताया कि खेती के लिए सबसे बड़ी समस्या पानी की है़ गांव के किसान खेती के लिए आगे आयें. उन्हें मनरेगा से कुआं, तालाब एवं डोभा खुदाई के लिए पैसे िदये जायेंगे.
