तैयारी . जुटेंगे हजारों श्रद्धालु, स्वागत को मेला स्थल सजधज कर तैयार
50 हजार आदिवासी साफाहोड़ ने गंगा में लगायी डुबकी
आदिवासी धर्मगुरु अपने शिष्यों के साथ राजमहल पहुंचे
अलग-अलग पूजा अखाड़ा बनाया
राजमहल : राजकीय माघी पूर्णिमा मेला के अवसर पर उत्तरवाहिनी गंगा में रविवार को 50 हजार आदिवासी श्रद्वालुओं ने डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की. माघी पूर्णिमा से एक दिन पूर्व संथाल परगना के अलावा बिहार, बंगाल, असम के आदिवासी धर्मगुरु अपने शिष्यों के साथ राजमहल पहुंचे और मेला स्थल पर अलग-अलग पूजा अखाड़ा बनाया.
ज्ञात हो कि बनने वाली वेदी में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, भगवान श्री कृष्ण व भगवान शंकर की तसवीर लगायी जाती है. अवसर पर आदिवासियों के साफाहोड़ व बिदिनहोड़ सम्प्रदाय के लोग गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं. वहीं आदिवासी भाषा में 24 घंटा भजन-कीर्तन किया जाता है.
गंगा नदी में चढ़ाते हैं विशेष प्रसाद
पवित्र गंगा मां से मांगी गयी मन्नत पूरी होने पर माघी पूर्णिमा पर श्रद्वालु गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना के बाद जोड़ा कबूतर, पाठा व डाव गंगा नदी में चढ़ाते हैं. इसके अलावा अवसर पर बच्चों का मुंडन भी किया जाता है.
