16 दिवसीय महिला हिंसा विरोधी पखवारा शुरू संवाददाता, साहिबगंजमहिला हिंसा आज भी ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है. यह बेहद शर्मनाक है. तमाम कानूनों के बावजूद आज भी महिलाएं घर से लेकर बाहर तक हिंसा की शिकार हो रही हैं. यह बातें मानव संसाधन एवं पर्यावरण विकास समिति के सचिव अनिता कुमारी ने गुरुवार को पत्रकारों से कही. उन्होंने कहा कि ग्लोबल विलेज की परिकल्पना ने भौगोलिक सीमा को तोड़ा है. इंटरनेट ने घर और बाजार की दूरी को भी खत्म कर दिया है. दुनिया के एक छोर पर बैठा व्यक्ति दूसरी छोर से सूचनाएं एकत्र कर लेता है. यहां तक तो ठीक है, लेकिन ये सारी उपलब्धियां बेमानी लगती है, जब हम नित्य प्रति महिला हिंसा की घटनाओं को देखते हैं. कुछ घटनाएं जो समान्यत: गंभीर होती है, लेकिन उन्हें हिंसा न मानकर सामान्य व्यवहार माना जाता है. इसमें बेटी को कम खाना देना, शिक्षा से वंचित रखना, खेलकूद का मौका नहीं देना. ये भी हिंसा के एक स्वरूप है. क्योंकि ये महिलाओं के सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया को अवरूध करते हैं.महिला हिंंसा के विरोध स्वरूप 16 दिवसीय अभियान का शुरुआत 1991 में विश्व महिला नेतृत्व के अवसर पर महिला मानवाधिकार विषयक विश्वस्तरीय सम्मेलन वियना आस्ट्रिया में किया गया. इस सम्मेलन में पांच लाख हस्ताक्षर युक्त अपील 124 देश 23 भाषा. 1999 में संयुक्त राष्ट्र ने 25 नवंबर से 10 दिसंबर के पखवारे को महिला हिंसा विरोधी पखवारा घोषित किया. इन कार्यक्रमों का होगा आयोजननुक्कल सभा, हस्ताक्षर अभियान, उच्च विद्यालय के छात्राओं का खेलकूद प्रतियोगिता, पुलिस का महिला हिंसा रोकने के लिए शपथ ग्रहण
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16 दिवसीय महिला हिंसा विरोधी पखवारा शुरू संवाददाता, साहिबगंजमहिला हिंसा आज भी ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है. यह बेहद शर्मनाक है. तमाम कानूनों के बावजूद आज भी महिलाएं घर से लेकर बाहर तक हिंसा की शिकार हो रही हैं. यह बातें मानव संसाधन एवं पर्यावरण विकास समिति के सचिव अनिता कुमारी ने गुरुवार को पत्रकारों […]
