Usha Martin University Convocation 2026, रांची, (जितेन्द्र कुमार): शिक्षा का वास्तविक अर्थ केवल डिग्रियां हासिल करना नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और समाज के प्रति जागरूक नागरिक बनना है. इसी मूल मंत्र के साथ रांची के उषा मार्टिन विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ. समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने विद्यार्थियों को जीवन का नया दृष्टिकोण देते हुए कहा कि शिक्षा समाज के लिए होनी चाहिए, केवल स्वयं के लिए नहीं.
भारतीय ज्ञान, संस्कृति को समझना होगा युवा पीढ़ी को: राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान
राज्यपाल ने कहा कि युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपरा को जानना और समझना होगा. शिक्षा मानव जाति के लिए ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार है, जिसे केवल नौकरी या धन अर्जन तक सीमित नहीं किया जा सकता. शिक्षा के माध्यम से हम अपनी नैसर्गिक प्रतिभा को निखारते हैं और यही प्रगति और विकास की आधारशिला है. उन्होंने कहा कि ये उपाधि जहां शैक्षणिक जीवन की यात्रा का सफल समापन है, वहीं यह व्यावसायिक जीवन की नयी शुरुआत का प्रतीक भी है. आज का कार्यक्रम ‘दीक्षांत’ है, ‘शिक्षांत’ नहीं. विद्यार्थियों को जीवन भर सीखने की प्रक्रिया से जुड़े रहना होगा. शिक्षा रचनात्मकता, आत्मीय सोच और समस्या समाधान की क्षमता को विकसित करती है. राज्यपाल ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि उषा मार्टिन विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता का केंद्र बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है.
उपसभापति हरिवंश सिंह ने नैतिक रूप से सक्षम बनने का किया अह्वान
मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि उपाधि विद्यार्थियों को पहचान देती है, लेकिन उनका चरित्र, दृष्टिकोण, कार्य-संस्कृति और नैतिक मूल्य ही उन्हें वास्तव में उत्कृष्ट बनाते हैं. उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं को तकनीकी और नैतिक रूप से सक्षम बनने का आह्वान किया. साथ ही कहा कि आविष्कार और ज्ञान अर्जन की प्रक्रिया कभी रुकनी नहीं चाहिए और शिक्षा का उपयोग समाज के हित में होना चाहिए.
समाज के दिग्गजों को मानद उपाधि
समारोह की गरिमा को बढ़ाते हुए समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाली दो विभूतियों को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को भी पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया. वहीं सुब्बा राव पम्पाना को ऊर्जा क्षेत्र में योगदान और सतत औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने में उनके कुशल नेतृत्व के लिए मानद उपाधि प्रदान की गयी.
1191 विद्यार्थियों को मिली उपाधि
दीक्षांत समारोह में कुल 1191 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गयी. इनमें 19 शोधार्थियों को पीएचडी, 773 स्नातक, 166 स्नातकोत्तर और 233 डिप्लोमा प्रमाणपत्र शामिल हैं. इसके अलावा 21 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 19 को रजत पदक से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और झारखंड के प्रथम राज्यपाल व विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभात कुमार ने संयुक्त रूप से सम्मानित किया.
शैक्षणिक शोभायात्रा से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत भव्य शैक्षणिक शोभायात्रा से हुई. राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान की धुन से सभागार गूंज उठा. दीप प्रज्वलन के साथ ज्ञान के इस उत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया गया. विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मधुलिका कौशिक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केवल आठ वर्षों में विश्वविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं.
समारोह में कौन कौन रहे उपस्थित
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभात कुमार, अध्यक्ष हेमंत गोयल, प्रति कुलपति प्रो. मिलिंद, कुलसचिव डॉ. शिव प्रताप वर्मा, डीन (शैक्षणिक) प्रो. बीएन सिन्हा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनय सिंह, परिसर निदेशक डॉ. अनिल कुमार मिश्रा, वित्त अधिकारी रेनु लाल, ऋषि राज महाराज सहित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सभी सदस्य उपस्थित रहे.
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