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शरणार्थी या बंजारे नहीं, ये सहायक पुलिसकर्मी हैं, गरज के साथ हुई भारी बारिश में खुले आसमान के नीचे ऐसे गुजरी रात

By Prabhat Khabar Digital Desk
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टेंट में दिन और रात गुजार रहे हैं नक्सल प्रभावित 12 जिलों से आये सहायक पुलिसकर्मी.
टेंट में दिन और रात गुजार रहे हैं नक्सल प्रभावित 12 जिलों से आये सहायक पुलिसकर्मी.
Sunil Gupta

रांची : ये तस्वीर किसी गांव के मैदान की नहीं है. मैदान में जो प्लास्टिक के टेंट हैं, वे शरणार्थियों के लिए नहीं बनाये गये हैं. ये लोग बंजारे भी नहीं हैं, जो कहीं जाते समय यहां रुक गये हैं. ये तस्वीरें झारखंड की राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान की है. टेंट में रहने वाले लोग नक्सल प्रभावित 12 जिलों में लोगों को नक्सलियों से सुरक्षा देने के लिए तैनात किये गये सहायक पुलिसकर्मी हैं.

एक दर्जन जिलों के 2,350 सहायक पुलिसकर्मी सात दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलन कर रहे पुलिसकर्मियों में महिलाएं भी हैं. कुछ महिला पुलिसकर्मियों के साथ उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं. ये सभी इस मैदान में पिछले सात दिन से डटे हुए हैं. अपनी नौकरी स्थायी करने की मांग कर रहे हैं. कड़ाके की धूप हो या आंधी-बरसात. हर मौसम को झेल रहे हैं.

गुरुवार की देर मौसम बदल गया. मेघ गर्जन के साथ तेज बारिश हुई. इस दौरान भी प्लास्टिक के टेंट में किसी तरह इन सहायक पुलिसकर्मियों ने रात गुजारी. रात भर तंबू के बाहर मिट्टी से मेड़ बनाते रहे, ताकि दरी न भींग जाये. बच्चे को गीले बिस्तर पर न सोना पड़े. इसके लिए खुद भींगते रहे. रांची नगर निगम की ओर से इन्हें बिछाने के लिए तिरपाल मिला था, उसी से तंबू बनाया और किसी तरह कुछ लोग बारिश से बच पाये.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में झारखंड की तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने 2500 सहायक पुलिसकर्मियों की अनुबंध पर नियुक्ति की थी. इन लोगों का वेतन 10 हजार रुपये प्रति माह तय हुआ था. कथित तौर पर आश्वासन दिया गया था कि तीन साल बाद जिला पुलिस में इन्हें समायोजित कर लिया जायेगा. या पुलिस की बहाली होगी, तो नियुक्ति में इन्हें प्राथमिकता दी जायेगी.

रघुवर दास की सरकार ने तीन साल के अनुबंध पर किया था सहायक पुलिसकर्मियों को बहाल.
रघुवर दास की सरकार ने तीन साल के अनुबंध पर किया था सहायक पुलिसकर्मियों को बहाल.
Sunil Gupta

मोरहाबादी में आंदोलन कर रहे इन सहायक पुलिसकर्मियों का आरोप है कि अब जबकि इनका अनुबंध खत्म हो गया, सरकार इन्हें स्थायी नौकरी देने के बारे में कोई विचार नहीं कर रही है. इनका यह भी आरोप है कि 31 अगस्त को इनका अनुबंध खत्म होना था. इन्हें 30 अगस्त तक का ही वेतन दिया गया.

टेंट को सुरक्षित करने के लिए मिलकर ले जा रहे मिट्टी.
टेंट को सुरक्षित करने के लिए मिलकर ले जा रहे मिट्टी.
Sunil Gupta

सहायक पुलिसकर्मी कह रहे हैं कि 10 हजार रुपये किसी परिवार के लिए पर्याप्त नहीं हैं. अब यह भी छिन जायेगा, तो वे भुखमरी की स्थिति में आ जायेंगे. इसलिए उन्हें आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा. वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारियों के साथ उनकी दो दौर की वार्ता विफल हो चुकी है. विरोधी दलों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन सरकार में शामिल किसी दल ने उनकी मांगों पर अपनी राय नहीं दी है.

बिछाने के लिए रांची नगर निगम ने दिया था प्लास्टिक का तिरपाल, उसी से बनाया टेंट.
बिछाने के लिए रांची नगर निगम ने दिया था प्लास्टिक का तिरपाल, उसी से बनाया टेंट.
Sunil Gupta

दूसरी तरफ, रांची पुलिस प्रशासन इन सहायक पुलिसकर्मियों के आंदोलन खत्म कराने में जुटी हुई है. सख्ती भी दिखाने लगी है. 14 सितंबर की शाम को आंदोलन कर रहे एक हजार पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी. 20 लोगों को नामजद किया गया. 12 सितंबर, 2020 को ये लोग राज भवन और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए अलग-अलग जिलों से आये थे, लेकिन जब भी ये आगे बढ़े, इन्हें रोक दिया गया.

चंदा करके होटल में बनवाते हैं भोजन.
चंदा करके होटल में बनवाते हैं भोजन.
Sunil Gupta

Posted By : Mithilesh Jha

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