Ranchi: चले आईए धुर्वा, गुलजार हुआ बाजार, 5000 लोगों को रोजगार, 120 फीट की ऊंचाई पर रोमांच का एहसास

Ranchi Rath Mela : रांची के धुर्वा स्थित जगन्नाथपुर में रथ मेला सज गया है. 5000 लोगों को अस्थायी रोजगार मिला है. 120 फीट की ऊंचाई को रोमांच देखना है, तो आइए.

Ranchi Rath Mela: जगन्नाथपुर रथ मेला आस्था के साथ-साथ लोक संस्कृति और मान्यताओं से भी जुड़ा है. इस वर्ष भी रथ मेला को लेकर जबरदस्त उत्साह दिख रहा है. मेला परिसर में दो दर्जन से अधिक झूले आकार ले चुके हैं. शाम ढलते ही मंदिर के साथ-साथ मेला परिसर रोशनी से खिलखिला उठ रहा है.

उल्लास और उमंग का संदेश लेकर आया रथ मेला

यह मेला पूजा-अर्चना के साथ जीवन में उल्लास और उमंग का संदेश लेकर भी आ रहा है. 7 से 17 जुलाई तक लगनेवाले इस मेला में लोग खुशियों का पल गुजारेंगे. गुजरते समय के साथ मेला भी बदलती तकनीक से रूबरू करायेगा. पारंपरिक झूले की जगह अब इलेक्ट्रॉनिक झूले होंगे. साथ ही यहां परंपरागत व्यंजन, घरेलू सजावटी सामग्री के साथ-साथ रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाले सामग्रियां भी आसानी से मिल जायेंगी.

10 से 15 इलेक्ट्रिक से चलने वाले झूले

मेला परिसर को दो हिस्से पूर्वी और पश्चिमी मेला में बांटा गया है, ताकि भीड़ बंटे. करीब 60 झूले लगाये जा रहे हैं. झूले पर चार वर्ष के बच्चे से लेकर 65 वर्ष तक के बुजुर्ग को चढ़ने की अनुमति होगी. बच्चों के लिए ट्रेन, मिक्की हाउस, जंपिंग कार, धूम बाइक, ड्रैगन रेस, हॉर्स राइड, हेलीकॉप्टर जैसे दर्जनों झूले लगाये गये हैं. वहीं, 12 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों से लेकर वयस्कों के लिए 18 फीट से लेकर 120 फीट ऊंचे टावर झूले लगाये गये हैं. इस बार 10-15 झूले पूरी तरह इलेक्ट्रिकल ऑपरेटेड होंगे, जिस पर लोग 10 मिनट तक लुत्फ उठा सकते हैं.

मौत का कुआं से लेकर जादू के खेल तक

पिछले वर्ष 11 टावर झूले लगाये गये थे, जो इस बार 15 हैं. बीते वर्ष सात ब्रेक डांस झूले रोमांचित कर रहे थे, जो इस बार नौ अलग-अलग आकार के होंगे. चार टोरा-टोरा झूले लगाये गये हैं. वहीं तीन मौत के कुएं भी रोमांच का केंद्र होंगे. इस बार 80 से 90 फीट गहरा मौत का कुआं होगा, जिसमें दो की जगह तीन चार पहिया कार जोड़ी बनाकर सबको रोमांचित करेगी. साथ ही बच्चाें के लिए 15 से अधिक झूले लगाये गये हैं. ड्रैगन ट्रेन, हॉर्स राइड, हेलिकॉप्टर के चार झूले होंगे. वहीं अलग-अलग आकार के 10 नाव झूले भी होंगे.

शाम ढलते ही लाइटिंग करेगी आकर्षित

मेला परिसर को खास लाइटिंग से सजाया गया है. 100 केबी के चार से अधिक जेनरेटर की व्यवस्था की गयी है. इससे न केवल झूले बल्कि मीना बाजार भी जगमगायेगा. शाम पांच बजे मेला परिसर रोशनी से जगमगा उठेगा.

मेला से 5000 लोगों को मिलेगा रोजगार

चार एकड़ में फैले मेला परिसर में झूले, मेला के संचालन और व्यवस्था में लगभग 1000 से अधिक लोग जुटे हैं. एक झूला के संचालन में 15 से अधिक स्टाफ लगाये गये हैं. इस मेला से 250 से अधिक परिवार जुड़ा है. वहीं, पूरे मेला परिसर में 5000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा. इसमें फूड स्टॉल व मीना बाजार के स्टॉल धारक भी शामिल होंगे.

सुनामी और वाटर बोटिंग का लुत्फ उठा सकेंगे

इस वर्ष जगन्नाथपुर मेला में तीन खास झूले आकर्षण के केंद्र होंगे. आम तौर पर बड़े एम्यूजमेंट पार्क में उपलब्ध सुनामी और थ्रीस-बी झूला का आनंद रांचीवासी उठा सकेंगे. झूले 70 फीट ऊपर आसमान से गोते लगवायेंगे. वहीं, हथौड़े के आकार का हैमर व रेंजर झूला 70 फीट की ऊंचाई पर 360 डिग्री हवा में नचायेगा. साथ ही हर उम्र के लोगों की पसंद को ध्यान में रखकर वाटर बोटिंग की व्यवस्था की जा रही है.

रथ मेला का बजट दोगुना से भी अधिक

इस बार मेला का बजट बीते वर्ष से काफी ज्यादा है. 2023 में मेला का टेंडर 76 लाख में फाइनल हुआ था, जो इस बार 1.92 करोड़ में निष्पादित किया गया है. मेला समन्वयक बिट्टू सिंह ने बताया कि झूले की दर 30 से 80 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित है. क्राफ्ट बाजार में झारखंड, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्पी अपने सामान की बिक्री करने पहुंचे हैं.

इस वर्ष दर्जन भर टावर झूले, बच्चों के लिए भी खास

टावर झूला का खासा क्रेज मेला में देखा जाता है. सबको इसका खास इंतजार रहता है. जगन्नाथपुर मेला परिसर में प्रवेश करते ही आसमान छूते टावर झूले नजर आयेंगे. इस वर्ष 10 से अधिक टावर झूले लगाये जा रहे हैं. बच्चे जहां हाथ से चलनेवाले 18 फीट ऊंचाई वाले टावर झूले का आनंद ले सकेंगे.

120 फीट की ऊंचाई पर ले जाएगा टावर झूला

मोटर संचालित टावर झूले 120 फीट की ऊंचाई पर ले जायेंगे. यह ऊंचाई झूले के सबसे टॉप के प्लेटफॉर्म की होगी, जहां लोगों को कुछ मिनट तक रोका जायेगा. लोग ऊंचाई से शहर का नजारा ले सकेंगे. 120 फीट ऊंचे टावर झूले में 28 से 30 ट्रॉलियां होंगी. इसमें 30 सीटर वाला एक, 26 सीटर वाला छह और 18 सीटर वाले तीन टावर झूले होंगे.

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By Mithilesh Jha

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