रांची में सेक्स वर्कर्स का आतंक, स्टेशन रोड की झोपड़ी बनी ‘धंधे का अड्डा’

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची के स्टेशन रोड पर सेक्स वर्कर्स की संदिग्ध गतिविधियां जारी हैं. कचहरी चौक घटना के बाद सख्ती बढ़ी, लेकिन चुटिया थाना क्षेत्र में देर रात झोपड़ी के आसपास इनकी गतिविधियां बदस्तूर जारी हैं. पुलिस सड़कों पर गश्त लगाती है, लेकिन उसकी यह कार्रवाई नाकाफी दिखाई देती है. पूरी कहानी नीचे पढ़िए.

रांची से प्रभात खबर टीम की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में कचहरी चौक पर किन्नरों के साथ शराब पीने के विवाद के बाद हुई हिट एंड रन, अपहरण और पुलिसकर्मी को कुचलने के प्रयास की सनसनीखेज घटना ने शहर को झकझोर दिया है. घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और कचहरी चौक के आसपास सख्ती बढ़ाई गई है. कुछ दिनों तक वहां अड्डेबाजी पर लगाम भी दिखी, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. ‘प्रभात खबर’ की टीम ने विभिन्न चौक-चौराहों का मुआयना किया. कचहरी चौक के आसपास अब अड्डेबाजी बंद है, लेकिन चुटिया थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड पर रोजाना गतिविधियां जारी हैं.

स्टेशन रोड की झोपड़ी बनी नया अड्डा

टीम की जांच में सामने आया कि चुटिया थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड पर गतिविधियां अब भी जारी हैं. सड़क किनारे दो चाय दुकानों के बीच बनी एक झोपड़ी को सेक्स वर्कर्स का मुख्य अड्डा बना लिया गया है. देर रात यहां संदिग्ध गतिविधियां खुलेआम देखी जा सकती हैं. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि रात होते ही यहां माहौल बदल जाता है और राहगीरों की आवाजाही असहज हो जाती है.

तीन रातों की निगरानी में सामने आई तस्वीर

‘प्रभात खबर’ की टीम ने लगातार तीन रातों तक रात 9.30 बजे से 1.30 बजे तक इलाके की निगरानी की है. पहली रात दो महिलाएं मुंह कपड़े से ढके सड़क किनारे खड़ी मिलीं. वे पैदल गुजर रहे युवकों से बातचीत करती दिखीं. तीन युवकों से बात हुई, लेकिन डील नहीं बनी. इसके बाद एक कार सवार से लंबी चर्चा होती नजर आई. दूसरी और तीसरी रात भी झोपड़ी के आसपास लगभग वही दृश्य दोहराया गया है. ग्राहक चाय की दुकानों पर रुकते हैं, फिर इशारों में बातचीत होती है और कुछ लोग झोपड़ी की ओर जाते देखे जाते हैं. कई बार सड़क पर ही अशोभनीय हरकतें की जाती हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है.

राहगीरों और स्थानीय लोगों में नाराजगी

स्टेशन रोड से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं. देर रात काम से लौटने वाले कर्मचारी, यात्री और आसपास के निवासी इस माहौल से असहज हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार महिलाएं राहगीरों को रोककर बातचीत करने की कोशिश करती हैं. गाड़ी चालकों को भी रुकने के लिए इशारे किए जाते हैं. इससे ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है. कुछ अभिभावकों ने चिंता जताई है कि युवा वर्ग तेजी से इस जाल में फंस रहा है. आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के कई युवक ऐसे संपर्क में आकर गलत राह पकड़ लेते हैं.

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पुलिस की भूमिका पर सवाल

कचहरी चौक की बड़ी घटना के बाद पुलिस कुछ दिनों तक सक्रिय दिखी है. बताया जाता है कि दुर्घटना वाली रात पुलिस की सख्ती देखकर कई लोग वहां से भाग निकले थे. लेकिन सामान्य दिनों में स्थिति फिर ढीली पड़ जाती है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमित गश्ती नहीं होने से ऐसे अड्डों को बढ़ावा मिल रहा है. हालांकि, पुलिस का कहना है कि सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाती है. लेकिन लगातार जारी गतिविधियां इस दावे पर सवाल खड़े करती हैं.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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