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झारखंड में टाना भगतों के तीन दिन की आर्थिक नाकेबंदी से रेलवे को 100 करोड़ का नुकसान

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
टाना भगत का प्रतिनिधिमंडल रांची पहुंचा. मुख्यमंत्री आवास में हेमंत सोरेन के साथ की बैठक.
टाना भगत का प्रतिनिधिमंडल रांची पहुंचा. मुख्यमंत्री आवास में हेमंत सोरेन के साथ की बैठक.
Prabhat Khabar

IRCTC News/Indian Railways News: रांची/लातेहार : झारखंड (Jharkhand) के लातेहार (Latehar District) में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम में संशोधन और जंगलों पर अपने अधिकारों की मांगों के साथ तीन दिन तक (बुधवार शाम से शुक्रवार की रात तक) टोरी जंक्शन पर रेल चक्का जाम करने के बाद विशेष आदिवासी समूह के लोग ‘टाना भगत’ (Tana Bhagat) की आर्थिक नाकेबंदी (Economic Blockade) समाप्त हो गयी. तीन दिन में रेलवे (Indian Railways) को 100 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के बाद इस रेल खंड पर ट्रेनों का परिचालन शुक्रवार देर रात से सामान्य हो गया. शनिवार को विधायक बैद्यनाथ राम के नेतृत्व में टाना भगत का एक प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए मुख्यमंत्री आवास पहुंचा.

रेलवे लाइन पर धरने पर बैठे टाना भगत के साथ बातचीत के जिला प्रशासन के प्रयास विफल हो गये. इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्थानीय विधायक बैद्यनाथ राम को टाना भगत को समझाने के लिए भेजा. बैजनाथ राम ने प्रशासनिक अधिकारियों एवं पुलिस के साथ-साथ अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मदद से इस विशेष आदिवासी समूह को मनाया.

टोरी जंक्शन पर धरने पर बैठे टाना भगतों से झारखंड सरकार की ओर से वार्ता करने पहुंचे स्थानीय विधायक बैद्यनाथ राम की बातों को आंदोलनकारियों ने पहले मानने से इनकार कर दिया था. कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं आकर आश्वस्त करेंगे कि उनकी मांगें पूरी की जायेंगी, तभी वे वहां से हटेंगे. इसके बाद बैद्यनाथ राम ने मुख्यमंत्री का संदेश उन्हें दिया कि हेमंत सोरेन खुद शनिवार को उनसे रांची में बातचीत करेंगे.

मुख्यमंत्री से मुलाकात का आश्वासन मिलने के बाद टाना भगत ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया और टोरी-बरकाकाना रेल खंड पर शुक्रवार देर रात ट्रेनों का परिचालन शुरू हो गया. इससे पहले स्थानीय विधायक से वार्ता के दौरान कई बार तीखी नोक-झोंक भी हुई. इससे पूर्व, छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1947 की धारा (145) की दफा 81ए के तहत टाना भगत समुदाय को मिलने वाले हक को लेकर बुधवार शाम सवा पांच बजे से रेलवे ट्रैक पर आंदोलन कर रहे लोगों ने शुक्रवार को किसी भी वरीय अधिकारी ने वार्ता नहीं की.

पचास घंटे से ज्यादा वक्त तक रेलवे ट्रैक पर आंदोलन कर रहे टाना भगत अपनी मांगों पर अड़े रहे. उधर, मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महासचिव समीर उरांव नें रांची में कहा कि 50 घंटे से स्वतंत्रता सेनानी के वंशज टाना भगत इस कड़ाके की धूप में रेलवे लाइन पर बैठे हैं और राज्य सरकार कुछ नहीं कर पायी है. यह बेहद शर्मनाक बात है. सरकार को अविलंब बातचीत करने के लिए राज्य के वरिष्ठ मंत्री और वरीय अधिकारियों को लगाकर आंदोलन को समाप्त करवाना चाहिए.

इस बीच, पूरे प्रकरण में लातेहार जिले के उपायुक्त जिशान कमर ने कहा था कि टाना भगतों के साथ जिला प्रशासन लगातार वार्ता कर रही है. उन्होंने कहा, ‘मैं स्वयं कई बार वार्ता कर चुका हूं. जिले के कई अधिकारियों को भी लगाया गया. उपमंडलीय अधिकारी (एसडीएम) को वार्ता के लिए कहा गया.’ उन्होंने उम्मीद जतायी थी कि एक-दो दिन में सकारात्मक परिणाम सामने आ जायेंगे और रेलवे ट्रैक को खाली करा लिया जायेगा. लेकिन, बैजनाथ राम की पहल रंग लायी और देर रात रेल परिचालन सामान्य हो गया.

रेलवे को 400 करोड़ से अधिक का नुकसान

टाना भगतों की इस अघोषित आर्थिक नाकेबंदी से रेलवे को प्रतिदिन लगभग 50 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. टोरी रेलवे स्टेशन के अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि प्रतिदिन टोरी-शिवपुर लाइन से 10 रेक और खलारी-पतरातू लाइन से 30 रेक कोयले का आवागमन होता है. आंदोलन के कारण सारा काम ठप हो गया है.

लॉकडाउन में यात्रियों की सुविधा के लिए चलायी जा रही स्पेशल ट्रेन राजधानी को भी इस मार्ग में रद्द कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि टाना भगतों के द्वारा किये जा रहे आंदोलन से रेलवे को अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की हानि का अनुमान है. धनबाद मंडल के रेल प्रबंधक एके मिश्रा ने बताया कि जून से शुक्रवार (4 सितंबर, 2020) तक रेलवे को धनबाद मंडल में लगभग 400 करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा सिर्फ रेलवे ट्रैक पर धरना-प्रदर्शन से हो चुका है.

Posted By : Mithilesh Jha

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