खर्च के अनुरूप नहीं दिख रही झारखंड की उपलब्धि, कई मामलों में लक्ष्य ही निर्धारित नहीं

विकास योजनाओं की भौतिक उपलब्धि उस पर हुए खर्च के अनुरूप नहीं है. ये नतीजा झारखंड सरकार ने आउटकम बजट की समीक्षा के दौरान निकाला है. कई मामलों में लक्ष्य ही निर्धारित नहीं, ऐसे में परिणाम का आकलन नहीं हो सकता

रांची : अधिकांश मामलों में विकास योजनाओं की भौतिक उपलब्धि उस पर हुए खर्च के अनुरूप नहीं है. यह निष्कर्ष आउटकम बजट की समीक्षा के दौरान राज्य सरकार ने निकाला है. कई मामलों में लक्ष्य ही निर्धारित नहीं है. ऐसी स्थिति में उसके परिणाम का आकलन नहीं हो सकता है. सरकार ने जनवरी 2022 तक आउटकम बजट की समीक्षा की. चालू वित्तीय वर्ष के दौरान विभिन्न विभागों ने कुल 370 योजनाएं शुरू की हैं. इसमें 10 करोड़ रुपये से अधिक लागतवाली योजनाओं की संख्या सबसे ज्यादा है.

370 योजनाओं की लागत 13337.78 करोड़ : सरकार ने समीक्षा में पाया कि जनवरी तक शुरू की गयी कुल 370 योजनाओं की लागत 13337.78 करोड़ रुपये है. विभागों ने एक करोड़ रुपये से कम लागत की कुल 76 योजनाएं, 1-5 करोड़ रुपये तक की 96 और 5-10 करोड़ रुपये तक की कुल 50 योजनाएं शुरू की.

इसके अलावा 10 करोड़ रुपये से अधिक लागतवाली 148 योजनाएं शुरू की. करीब 46 प्रतिशत योजनाएं पांच करोड़ रुपये से कम लागत की हैं.

कृषि-पशुपालन एवं सहकारिता से सबसे ज्यादा योजनाएं :

आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा योजनाएं कृषि-पशुपालन एवं सहकारिता के क्षेत्र से ली गयी हैं. इस विभाग ने कुल 86 योजनाओं का काम शुरू किया. विभाग द्वारा एक-एक करोड़ से कम लागतवाली कुल 21 योजनाओं पर काम शुरू किया गया है.

एक से पांच करोड़ तक की लागतवाली कुल 28 और पांच से 10 करोड़ रुपये की लागतवाली 24 योजनाएं ली गयी हैं. पंचायती राज विभाग द्वारा सबसे कम सिर्फ चार योजनाओं का काम शुरू किया गया है. विभाग ने एक से पांच करोड़ रुपये की कुल तीन योजनाएं शुरू की हैं. इन तीनों योजनाओं की कुल लागत 12.00 करोड़ रुपये है. पंचायती राज विभाग ने 10 करोड़ रुपये से अधिक लागतवाली एक योजना का काम शुरू किया है. स्वास्थ्य विभाग ने 180.73 करोड़ की लागत पर कुल 26 योजनाओं का कम शुरू किया है. नगर विकास विभाग द्वारा शुरू की गयी 14 योजनाओं की कुल लागत 1105.10 करोड़ रुपये है. इसमें 10 करोड़ रुपये से अधिक लागतवाली आठ योजनाएं शामिल हैं.

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Published by: Prabhat khabar news desk

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