चर्चित स्क्रैप घोटाला मामले में एक साल बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, विजिलेंस जांच रिपोर्ट फिर से चर्चा में

विजिलेंस विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर अफसर-कर्मी किये गये चार्जशीट

विजिलेंस विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर अफसर-कर्मी किये गये चार्जशीट

डकरा. पिछले वर्ष एनके एरिया में हुए चर्चित स्क्रैप घोटाला मामले को लेकर सीसीएल प्रबंधन, विजिलेंस विभाग, एनके प्रबंधन द्वारा गठित कमेटी और खलारी-मैक्लुस्कीगंज पुलिस ने क्या जांच की और उस पर क्या कार्रवाई हुई, यह आज तक रहस्य बना हुआ है. यह मामला आखिरी बार तब चर्चा में आया था, जब जब्त स्क्रैप की चोरी खलारी थाना के सामने से हो गयी थी. बताते चलें कि स्क्रैप का वजन ही सबूत था, जिसके आधार पर पुलिस की कार्रवाई को आगे बढ़ाना था क्योंकि सीआइएसएफ जवानों ने स्क्रैप कारोबारी को रिमोट से वजन कम करने मामले में रंगे हाथ पकड़ा था. आरोपियों की तस्वीर सहित लिखित मामला दर्ज कराया गया था. अब एक बार फिर यह मामला इसलिए चर्चा में आया है, क्योंकि विजिलेंस विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर सीसीएल प्रबंधन ने कुछ अधिकारियों को और एनके प्रबंधन ने कुछ कर्मचारियों को चार्जशीट दिया है और सभी को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा गया है. बताते चलें कि 17 जून 2025 से लेकर 25 दिसंबर 2025 तक इस मामले को लेकर कई घटनाएं हुई. सबसे पहले जून में एनके एरिया के वर्कशॉप से लगभग एक करोड़ रुपए के आर्मेचर की चोरी वहीं के विभागीय लोगों ने सार्वजनिक की. मिलीभगत में सीआइएसएफ और सीसीएल कर्मियों की भूमिका स्पष्ट तौर पर सामने आयी, लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आयी. रोहिणी से स्क्रैप की आड़ में कीमती पार्ट्स चोरी मामले में सभी नाटकीय घटनाक्रम को जब प्रभात खबर लगातार प्रकाशित करती रही, तब वहां भी जांच कमेटी बनायी गयी, जिसकी रिपोर्ट आज तक नहीं आयी. मैक्लुस्कीगंज पुलिस ने क्या कार्रवाई की, यह किसी को पता नहीं चला. दिसंबर में सीआइएसएफ जवानों ने केडीएच कांटाघर पर रिमोट से वजन कंट्रोल करने के मामले को जब पकड़ा, तब फिर से जांच कमेटी बनायी गयी, लेकिन उसका रिपोर्ट भी सामने नहीं आया. विजिलेंस टीम ने क्या जांच की है और कौन अधिकारी और कर्मचारी किन वजहों से संदेह के घेरे में है? इसके बारे में कोई भी कुछ बात करने के लिए तैयार नहीं है. इस प्रकरण की जानकारी एक अधिकारी ने अपना नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि एक ऐसे चेहरे को बचाया जा रहा है, जो स्क्रैप कारोबारी और बड़े अधिकारियों के बीच बिचौलिए का काम कर रहा था. स्क्रैप उठाव के समय वह गलत तरीके से प्रमुख भूमिका में था, लेकिन चार्जशीट नहीं दिया गया है. उसे इसलिए बचाया गया है, ताकि मामले का पोल खुलने से बचाया जा सके.

सीसीएल और राज्य सरकार में ठन गयी थी

रिमोट से कांटा घर का वजन कंट्रोल करने मामले को लेकर सीसीएल और राज्य सरकार में भी ठन गयी थी. सीसीएल के महाप्रबंधक इलेक्ट्रॉनिक एसके सिंह ने स्पष्ट तौर पर मीडिया को बताया था कि राज्य का माप तौल विभाग की भूमिका संदेहास्पद है. बाद में माप तौल विभाग की इंस्पेक्टर संगीता बाड़ा ने सीसीएल अधिकारियों पर ही मिलीभगत का लिखित आरोप लगायी थी. डिजिटाइजर को फोरेंसिक जांच के लिए सीसीएल और माप तौल विभाग ने अलग-अलग भेजा था, लेकिन उसका रिपोर्ट भी आज तक सार्वजनिक नहीं हुआ.

सिर्फ स्क्रैप कारोबारी को फायदा हुआ

इस मामले में सीसीएल को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ, महीनों काम बाधित रहा, सीआईएसएफ के कुछ जवानों पर भी कार्रवाई हुई, लेकिन असली लाभार्थी स्क्रैप उठाने वाली कंपनी राज मधु और सांई इंटरप्राइजेज पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, उल्टा टाइम एक्सटेंशन देकर विवाद के बाद बचे हुए स्क्रैप को भी उठवा दिया गया. स्क्रैप के आड़ में कैसे कीमती पार्ट्स की चोरी कंपनी में होती है और संबंधित अधिकारी कैसे इसमें सहयोग करते हैं वह इस घटना में एक उदाहरण के तौर पर चर्चा का विषय बन गया है लेकिन जांच और कार्यवाही के नाम पर नतीजा शून्य हो गया है. यह मामला सीसीएल सलाहकार समिति की बैठक में भी उठाया गया था और कड़ी कार्रवाई की बात हुई थी बावजूद एक साल बाद कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा किया गया है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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