नक्सलियों ने पुलिस पर हमले के लिए बनाया नया हथियार, ये हैं मास्टरमाइंड

Naxal News Jharkhand: झारखंड में पुलिस और सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादियों ने अब कंपोजिट आइइडी बनाना शुूर कर दिया है. पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाल की कुछ घटनओं की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. पुलिस ने इसके मास्टरमाइंड का भी पता लगा लिया है. हालांकि, अभी तक पुलिस उन तक पहुंच नहीं पायी है, लेकिन नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है.

Naxal News Jharkhand| रांची, अमन तिवारी : पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा और उसके आसपास के इलाकों में नक्सल अभियान के दौरान पुलिस अफसरों और जवानों को निशाना बनाने के लिए प्रतिबंधित नक्सली संगठन के सदस्य कमांड आइइडी का इस्तेमाल कर रहे हैं. हाल के दिनों में हुई घटनाओं की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 मार्च को नक्सलियों ने अभियान के दौरान छोटानागरा थाना क्षेत्र के मरांगपोंगा गांव से करीब एक किलोमीटर आगे पहले से लगाये गये एक आइइडी को ब्लास्ट किया था. इसकी चपेट में आने से सीआरपीएफ के एक अफसर सुनील कुमार मंडल शहीद हो गये. एक जवान पीपी दे घायल हो गये थे.

15 सेमी गोल और 1.1 मीटर लंबे लाइप से बनाया कंपोजिट आइइडी

पुलिस ने इस घटना की गहनता से जांच की. जांच में पाया कि यह आइइडी 15 सेंटीमीटर गोल और 1.1 मीटर लंबे पाइप से बनाया गया था. यह एक कमांड आइइडी था, जिसमें करीब 15 मीटर तार की मदद से दूर से कमांड देकर विस्फोट कराया गया था. कमांड आइइडी की वजह से घटना के बाद आसपास के इलाके में कोई नक्सली नजर नहीं आते हैं.

छोटानागरा और जराइकेला के जंगलों में घायल हुए थे 2 जवान

इसी तरह 12 अप्रैल को छोटानागरा और जराइकेला थाना क्षेत्र के सीमावर्ती जंगल में नक्सलियों के खिलाफ अभियान के दौरान आइइडी विस्फोट की चपेट में आने से दो कोबरा के जवान विष्णु सैनी और एसटीएफ जवान सुनील धान घायल हो गये थे. दोनों को जब रांची इलाज के लिए लाया गया, तब इलाज के क्रम में एक जवान सुनील धान शहीद हो गये.

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नक्सली हमले में घायल जवानों के शरीर से मिले 11 एमएम के लोहे के छड़ के टुकड़े

इस घटना में भी नक्सलियों ने दूर से ही कमांड के जरिये आइइडी को विस्फोट किया था. इलाज के क्रम में जवानों के शरीर से करीब 12 एमएम लोड़े की छड़ के टुकड़े निकले. जानकारी के अनुसार, नक्सली पहले प्रेशर आइइडी का इस्तेमाल करते थे. अब ये लोग जुगाड़ तकनीक का इस्तेमाल करके कमांड आइइडी तैयार कर घटना को अंजाम दे रहे हैं.

ये नक्सली हैं कंपोजिट आइइडी के मास्टरमाइंड

पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है कि कमांड आइइडी का इस्तेमाल करने में सेंट्रल कमेटी के शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा, अनल, अनमोल, अश्विन, मोछू, असीम मंडल, अजय महतो, सागेन अंगरिया, पिंटू लोहरा, चंदन लोहरा, अमित हांसदा, जयकांत, रूपा मुंडा, किशोर, जिलानी, मुन्नी सुरीन, आशा और मुकेश शामिल हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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