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झारखंड में 5 साल से कम उम्र के बच्चे हो रहे मोटापे का शिकार, लेकिन कुपोषित बच्चों की संख्या घटी- रिपोर्ट

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच में ये खुलासा हुआ है कि झारखंड में पांच साल से कम उम्र के बच्चों का वजन बढ़ता ही जा रहा है. इसमें शहर और ग्रामीण क्षेत्र, दोनों का आंकड़ा 2.8 फीसदी है.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच
Prabhat Khabar

रांची : झारखंड में पांच साल से कम उम्र के बच्चों का वजन बढ़ रहा है. यानी बच्चे मोटापा के शिकार हो रहे है. रिपोर्ट के अनुसार शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाके में रहनेवाले बच्चों में मोटापा बढ़ा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 में मोटे बच्चों की संख्या 1.5 फीसदी थी, लेकिन वर्ष 2020-21 में बढ़कर 2.8 फीसदी हो गयी है. शहर और ग्रामीण, दोनों का आंकड़ा 2.8 फीसदी है. वहीं राज्य में कुपोषित बच्चों की संख्या घटी है यानी स्थिति सुधरी है. यह हर स्तर में पोषण को बढ़ावा देने के कारण हुआ है.

कुपोषण के शिकार बच्चों की स्थिति सुधरी :

रिपोर्ट के अनुसार क्रोनिक मालन्यूट्रिशन (गंभीर कुपोषण) के शिकार बच्चों की स्थिति सुधरी है. एनएफएचएस-चार (वर्ष 2015-16 ) में पांच साल से नीचे के कुपोषित बच्चों का वजन 45.3 फीसदी कम था, लेकिन वर्ष 2020-21 में यह 39.6 फीसदी हो गया है.

वहीं पांच साल से नीचे के एक्यूट मालन्यूट्रिशन (कुपोषित) बच्चों की स्थिति भी सुधरी है. एनएफएचएस-चार (वर्ष 2015-16 ) का आंकड़ा 29 फीसदी था, लेकिन वर्ष 2020-21 में घटकर 22.4 फीसदी हो गया है. वैसे कुपोषित बच्चे, जिनका वजन कम था, उसमें भी सुधार हुआ है. वर्ष 2015-16 में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 47.1 था, जो घटकर 39.4 फीसदी पर आ गया है.

एनीमिया पीड़ित महिलाएं बढ़ीं

राज्य में एनीमिया से पीड़ित बच्चियों और महिलाओं की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. 15 से 49 साल की महिलाओं में एनीमिया की समस्या बढ़ी है. वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 65.3% था, जो बढ़कर 65.7% हो गया है. एनीमिया से पीड़ित शहरी महिलाओं की अपेक्षा ग्रामीण महिलाओं की स्थिति ज्यादा खराब है. शहर और ग्रामीण महिलाओं में तीन से छह फीसदी का अंतर है.

छोटे बच्चों में मोटापा चिंता का विषय : डॉ राजेश

रानी अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजेश कुमार ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार पांच साल से नीचे के बच्चों में मोटापा बढ़ा है. शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाके के बच्चों का वजन बढ़ाना ज्यादा चिंता का विषय है. कम उम्र में बच्चों का वजन बढ़ने से कई गंभीर बीमारी उभर कर सामने आती है. मोटापा से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हड्डी की बीमारी होने की संभावना ज्यादा होती है.

Posted By : Sameer Oraon

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Published Date

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