10 लाख के इनामी नक्सली सुरेश मुंडा और लोदरो लोहरा ने किया सरेंडर, बेटी की बात से प्रभावित होकर उठाया कदम

10 लाख का इनामी नक्सली सुरेश सिंह मुंडा और दो लाख का इनामी नक्सली लोदरा लोहरा ने कल सरेंडर कर दिया. दोनों कोल्हान और पोड़ाहाट में सक्रिय थे. बेटी की अपील पर सुरेश ने सरेंडर करने का फैसला किया

रांची : माओवादी जोनल कमांडर बुंडू के बारूहातू निवासी सुरेश सिंह मुंडा उर्फ श्रीपति मुंडा और एरिया कमांडर खूंटी के कोचांग टोला निवासी लोदरो लोहरा उर्फ सुभाष ने मंगलवार को आत्मसमर्पण कर दिया. झारखंड सरकार ने सुरेश पर 10 लाख और लोदरो लोहरा पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था.

यह जानकारी रांची रेंज के जोनल आइजी कार्यालय में मंगलवार को आइजी अभियान एवी होमकर, सीआरपीएफ आइजी राजीव कुमार, जोनल आइजी पंकज कंबोज, एसटीएफ डीआइजी अनूप बिरथरे और चाईबासा एसपी अजय लिंडा ने संयुक्त रूप से दी.

दोनों कोल्हान और पोड़ाहाट में थे सक्रिय :

आइजी अभियान एवी होमकर ने बताया कि दोनों संगठन के केंद्रीय कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी की टीम में सक्रिय रहे थे. फरवरी 2021 में पोड़ाहाट क्षेत्र के नक्सली जोनल कमांडर जीवन कंडुलना ने झारखंड पुलिस के समक्ष समर्पण किया था, जिसके बाद सुरेश सिंह मुंडा व लोदरो लोहरा को कोल्हान से पोड़ाहाट भेजा गया था. बाद में पुलिस की दबिश और आंतरिक शोषण से नाराज होकर दोनों पुनर्वास नीति से प्रभावित हुए और मुख्यधारा में शामिल होने की बात सोचकर सरेंडर कर दिया.

सुरेश पर 67, तो लोदरो पर 54 एफआइआर दर्ज

सुरेंडा मुंडा पर रांची और चाईबासा समेत कई थानों में 67 केस दर्ज हैं. वहीं लोदरो लोहरा पर खूंटी व चाईबासा जिले में कुल 54 केस दर्ज हैं. आइजी अभियान ने बताया कि दोनों नक्सलियों के लिए सरेंडर नीति के तहत आर्थिक सहायता, सुरक्षा व वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था की जायेगी. दोनों को दर्ज मामलों में न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना होगा. वर्तमान में ट्राइ जंक्शन कोल्हान एरिया में कई नक्सली सक्रिय हैं, जिनकी तलाश जारी है. दोनों के समर्पण के बाद कोल्हान और पोड़ाहाट में प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

सुरेश मुंडा की बेटी ने लिखी थी चिट्ठी

समर्पण के दौरान सुरेश मुंडा की 14 वर्षीया बेटी भी मौजूद थी. उसने बताया कि वह अपने पिता को कई साल बाद देख रही है. मां की मौत के बाद वह रिश्तेदार के यहां रह कर पढ़ाई कर रही थी. उसने पिता को समर्पण करने के लिए चिट्ठी भी लिखी थी. वहीं सुरेश सिंह मुंडा ने बताया कि उसकी बेटी ने भी यह कहते हुए समझाया था कि आपके साथ काम करनेवाले नक्सली समर्पण कर सामान्य जीवन जी रहे हैं. इसलिए आप भी समर्पण कर दें. बच्ची की बात से वह काफी प्रभावित हुआ और समर्पण करने के लिए तैयार हुआ.

Posted By: Sameer Oraon

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Published by: Prabhat khabar news desk

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