झारखंड में दिल्ली से भी बड़ा शराब घोटाला, मुख्यमंत्री से जुड़े हैं तार, बाबूलाल मरांडी का गंभीर आरोप

Jharkhand Liquor Scam: झारखंड शराब घोटाला मामले में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाये हैं. कहा कि शराब घोटाले की परत जिस तरह से खुल रही रही है, उससे स्पष्ट हो रहा है कि झारखंड में दिल्ली से भी बड़ा शराब घोटाला हुआ है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विनय चौबे को गिरफ्तार कर सरकार यह भ्रम फैलाना चाहती है कि वह घोटाले में शामिल नहीं है, जबकि घोटाले के तार मुख्यमंत्री तक जुड़े हैं.

Jharkhand Liquor Scam: झारखंड शराब घोटाला मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाये हैं. बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि शराब घोटाला में मुख्यमंत्री शामिल हैं. वह बतायें कि 3 साल पहले लिखे उनके पत्र (बाबूलाल के पत्र) पर सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री पाक-साफ हैं, तो शराब घोटाले की सीबीआई जांच कराने की अनुशंसा करें. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड में एक व्यक्ति को अवैध तरीके से डीजीपी बनाकर रखा गया है, ताकि घोटालेबाजों को बचाया जा सके. प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गवाहों को धमकी मिल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार गिरफ्तार आईएएस अधिकारी विनय चौबे के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा की चिंता करे.

‘1 अप्रैल 2022 को सरकार को लिखी थी चिट्ठी, नहीं हुई कार्रवाई’

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि शराब घोटाले की परत जिस तरह से खुल रही रही है, उससे स्पष्ट हो रहा है कि झारखंड में दिल्ली से भी बड़ा शराब घोटाला हुआ है. मरांडी ने कहा कि उन्होंने कहा कि 19 अप्रैल 2022 को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों द्वारा झारखंड राज्य बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की निविदा जेसीबीसीएल /02 दिनांक 01 अप्रैल 2022 में अंकित बिंदुओं की अवहेलना कर एक साजिश के तहत छत्तीसगढ़ की विशेष कंपनी को टेंडर देने एवं उससे होने वाले भारी राजस्व की क्षति की ओर ध्यान आकर्षित कराया था.

टेंडर की शर्तों में अधिकतम लाभांश को बदला गया – मरांडी

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पत्र में यह भी बताया गया था कि निविदा की कंडिका 9.3 में 3.90 प्रतिशत अधिकतम लाभांश को बदलकर निविदा डालने वाली इकाइयों से न्यूनतम मार्जिन दर्शाने की बात अंकित है. इसकी वजह से AtoZ इंफ्रा सर्विस लिमिटेड, प्राइम वन वर्कफोर प्राइवेट लिमिटेड, सुमित फैसिलेशन लिमिटेड और ईगर हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड, जो पूर्व में उनके मनोनुकूल शर्तें नहीं होने के कारण टेंडर नहीं डाल सके थे, टेंडर में भाग ले सकें.

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‘सरकार ने गड़बड़ी रोकने की बजाय उसमें मदद की’

भाजपा नेता ने कहा कि सरकार को पत्र लिखने के बावजूद सरकार ने उसका संज्ञान नहीं लिया. उन्हें पता था कि गड़बड़ी हो रही है, लेकिन गड़बड़ी रोकने की बजाय उसमें अधिकारियों का साथ दिया और उससे होने वाली कमाई का लाभ भी लिया. बाबूलाल ने कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की जिन कंपनियों के नाम पत्र में लिखे थे, उनकी निविदा मंजूर की गयी, काम भी मिला.

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आनन-फानन में विनय चौबे को गिरफ्तार किया गया

नेता प्रतिपक्ष ने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री की नींद तब खुली, जब 27 सितंबर 2024 को अखबार में खबर छपी कि शराब घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ की जांच एजेंसियों ने झारखंड के आईएएस अधिकारी विनय चौबे पर कार्रवाई की अनुमति मांगी. झारखंड सरकार में बैठे लोगों के कान खड़े हुए. जांच का भय सताने लगा. इसलिए आनन-फानन में अक्टूबर 2024 में प्राइमरी इन्क्वायरी (पीई) सेटअप की गयी, लेकिन एफआइआर दर्ज नहीं हुआ. इससे स्पष्ट है कि घोटाले पर पर्दा डालने और बड़ी मछलियों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की कार्रवाई के बाद हड़बड़ी में जांच शुरू हुई. यह सोची-समझी साजिश है. कल ही एसीबी ने आनन-फानन में विनय चौबे पर एफआईआर दर्ज की और कल ही गिरफ्तार भी कर लिया.

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जमीन घोटाला में ईडी के गवाहों पर डाला जा रहा दबाव

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इस घोटाले के पहले भी राज्य के 2 अंचल अधिकारी मनोज कुमार और शैलेश एक घोटाले में ईडी के गवाह हैं. एसीबी ने मुकदमा दर्ज किया, छापेमारी की, ताकि मामले को लटकाया जा सके. अब गवाहों को धमकी दी जा रही है कि गवाही से मुकर जाओ, नहीं तो कार्रवाई होगी. बाबूलाल ने कहा कि राज्य में एक जमीन से जुड़ा बड़ा मामला है. इसमें 3 लोग उमेश टोप्पो, राज लकड़ा, प्रवीण जायसवाल प्रमुख गवाह हैं. इन पर भी बयानों से मुकरने का दबाव डाला गया. ऐसा नहीं करने पर इन्हें जेल भेज दिया गया, ताकि बड़ी मछलियां न फंसें.

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‘मुख्यमंत्री पाक-साफ हैं, तो सीबीआई जांच की अनुशंसा करें’

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विनय चौबे को गिरफ्तार कर सरकार यह भ्रम फैलाना चाहती है कि वह घोटाले में शामिल नहीं है, जबकि घोटाले के तार मुख्यमंत्री तक जुड़े हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि शराब घोटाला 2 राज्यों से जुड़ा हुआ है. इसलिए इसकी जांच सीबीआई से कराने की अविलंब अनुशंसा करें. प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, प्रवक्ता अजय साह भी उपस्थित थे.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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