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झारखंड के गांवों में दो महीने में करीब 25 हजार ग्रामीणों की मौत, जानें स्वास्थ्य विभाग ने क्या कहा

By Prabhat khabar Digital
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देवघर के देवीपुर प्रखंड के पनन बोना गांव में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच करते चिकित्सक.
देवघर के देवीपुर प्रखंड के पनन बोना गांव में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच करते चिकित्सक.
ट्विटर.

Jharkhand News (रांची) : स्वास्थ्य विभाग ने गत 25 मई से झारखंड के ग्रामीण इलाकों में सघन जन स्वास्थ्य सर्वे शुरू किया था. इसमें अब तक 49,12,469 घरों में जांच हो चुकी है. इस दौरान पता चला है कि पिछले दो महीने में ग्रामीण इलाकों में 24,849 लोगों की मौत हुई है. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी मौतों को सामान्य मौत कहा है. 10 दिनों के इस सर्वे के दौरान 15,692 ग्रामीण टीबी के संदिग्ध मरीज मिले. वहीं, अभियान में 1,11,520 लोगों में डायबिटीज और 1,13,296 ग्रामीणों में बीपी और ह्रदय रोग के लक्षण मिले हैं.

स्वास्थ्य विभाग के IEC के नोडल पदाधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी ने पत्रकारों से कहा कि राज्य में प्रतिमाह औसतन 70 हजार लोगों की मौत होती है. वहीं, करीब 72 हजार बच्चों का जन्म भी होता है. ऐसे में पिछले दो महीने में राज्य के ग्रामीण इलाकों में 24,849 लोगों की मौत कोरोना से नहीं हुई है, बल्कि ये सभी सामान्य मौतें थीं.

80 प्रतिशत ग्रामीण इलाका संक्रमण से अछूता

सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि पूर्व में ग्रामीण इलाकों में संक्रमण की आशंका जतायी गयी थी. इसकी जांच के लिए सरकार ने यह अभियान चलाया. अब तक दो करोड़ 44 लाख 10 हजार 412 लोगों की जांच हो चुकी है. इनमें 1,86,509 का संदेह के आधार पर रैपिड एंटीजन टेस्ट किया गया, जिसमें 920 ही संक्रमित मिले हैं. इनमें भी केवल 9 ऐसे संक्रमित मिले, जिन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा. बाकी होम आइसोलेशन में हैं. वहीं, 35 बच्चे भी संक्रमित मिले हैं.

कोरोना वेरिएंट की मारक क्षमता की जांच करायेगी सरकार

कोरोना के किस वेरिएंट में मारक क्षमता अधिक है, राज्य सरकार इसका पता लगायेगी. केंद्र सरकार के निर्देश पर अब हर 15 दिनों में मृत लोगों के वेरिएंट का पता लगाने के लिए सैंपल ILS, भुवनेश्वर भेजा जायेगा. साथ ही झारखंड सरकार अब राज्य में इलाकावार कोरोना की मारक क्षमता का भी अध्ययन करायेगी.

IEC के नोडल पदाधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी ने बताया कि सरकार इस बात की जानकारी जुटायेगी कि राज्य में कितने प्रकार के म्यूटेंट एक्टिव थे और कौन म्यूटेंट कितना खतरनाक है. वहीं, जिन क्षेत्रों में ज्यादा मरीज मिल रहे हैं, वहां का भी सैंपल भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि यह पता चल सके कि किस वेरिएंट में कितना संक्रमण हो रहा है. वेरिएंट का पता लगने पर सरकार उसे काबू करने के लिए कदम उठायेगी.

एक अप्रैल के बाद कोरोना से मरनेवालों का सैंपल भेजना अनिवार्य

एक अप्रैल के बाद कोरोना से मरनेवालों का सैंपल भेजना अनिवार्य किया गया है. इसके लिए लैब संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित जिले के डीसी से मृतकों का SRF पता करें और उनका सैंपल भुवनेश्वर भेजना सुनिश्चित करें.

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