हेमंत सोरेन ने अमित शाह के सामने 1.36 लाख करोड़ के बकाया और सरना धर्म कोड समेत 31 मुद्दे उठाये

Hemant Soren in Eastern Zonal Council Meeting: रांची के होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष 37 मुद्दे उठाये. इसमें केंद्र सरकार पर 1.36 लाख करोड़ रुपए के बकाया राशि और सरना धर्म कोड की मांग शामिल है. बैठक में हेमंत सोरेन ने और किन-किन मुद्दों को उठाया, यहां पढ़ें.

Hemant Soren in Eastern Zonal Council Meeting: झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राज्यों के विकास के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया. अमित शाह ने गुरुवार 10 जुलाई को परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार नये सिरे से ध्यान देते हुए और नयी दिशा के साथ राज्यों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में 4 राज्यों के प्रतिनिधि हुए शामिल

पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी सहित 4 पूर्वी राज्यों (झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. अधिकारियों ने बताया कि हेमंत सोरेन ने राज्य से संबंधित 31 मुद्दे उठाये, जिनमें कोयला क्षेत्र के केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों पर 1.36 लाख करोड़ रुपए के बकाया का मुद्दा भी शामिल है.

बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन का मुद्दा उठा

हेमंत सोरेन ने ‘एमएसएमई’ के माध्यम से बेहतर बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन का आह्वान किया. झारखंड ने आदिवासियों के लिए अलग सरना धर्म कोड का मुद्दा भी उठाया. बुधवार रात राज्य की राजधानी पहुंचे अमित शाह बैठक के बाद एक विशेष विमान से दिल्ली रवाना हो गये.

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हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर किया यह पोस्ट

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया, जिसमें कहा कि उनकी मांगों में सार्वजनिक उपक्रमों में स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता, खदानों को सुरक्षित तरीके से बंद करना और पर्यटन को बढ़ावा देना तथा आदिवासी विरासत की रक्षा के लिए केंद्र का समर्थन शामिल हैं. राज्य में बुनियादी ढांचे को बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें महत्वपूर्ण रेलवे और राजमार्ग योजनाओं के अलावा एक मेट्रो परियोजना का प्रस्ताव शामिल है.

कोयला क्षेत्र अधिनियम में संशोधन की मांग

झारखंड ने कोयला क्षेत्र (अधिग्रहण और विकास) अधिनियम में संशोधन की मांग की, ताकि खनन कंपनियां खनन पूरा होने के बाद राज्य सरकार को जमीन वापस कर दें. मई में नीति आयोग के साथ बैठक के दौरान, झारखंड के सीएम ने मांग की थी कि खनन कंपनियों को राज्य के भीतर उपयोग किये जाने वाले कुल उत्पादन की 30 प्रतिशत क्षमता वाले ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करने का अधिकार दिया जाये.

पूर्वोत्तर की तरह झारखंड के लिए मांगी विशेष सहायता

उन्होंने कहा था कि इससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा. मुख्यमंत्री ने यह भी आग्रह किया था कि पूर्वोत्तर राज्यों को दी जाने वाली विशेष सहायता झारखंड को भी दी जाये. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बैठक में हेमंत सोरेन के अलावा झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री दीपक बिरुवा, मुख्य सचिव अलका तिवारी, प्रमुख सचिव (गृह) वंदना दादेल और डीजीपी अनुराग गुप्ता शामिल हुए.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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