रांची. भारतीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान (निसा), नामकुम का 102वां स्थापना दिवस (20 सितंबर 1924) समारोह शनिवार को मनाया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नयी दिल्ली के उपमहानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी) डॉ श्याम नारायण झा ने संस्थान के अनुसंधान और विकास प्रयासों की सराहना की. उन्होंने बाजरे की रोटी के लिए विकसित ग्लूटेन-फ्री बाइंडर को पौष्टिक बाजरा आधारित उत्पादों के प्रसार की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताया. निदेशक डॉ अभिजीत कर ने अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान की उपलब्धियों तथा भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एससी दुबे और भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक डॉ सुजय रक्षित विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए.
कई एमओयू हुए
संस्थान के स्थापना दिवस के अवसर पर कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आर्यावर्त एग्रो टेक प्रालि (देवघर), डीएसआर गरुड़ा एरियल्स प्रालि (खूंटी) और शुभारंभ (रांची) के साथ तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये. साथ ही हिंदी उल्लास पखवाड़ा के दौरान आयोजित वाद-विवाद, टंकण, निबंध, अन्त्याक्षरी, प्रश्नोत्तरी और सुलेख-श्रुतिलेख प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किये गये.पत्रिका का विमोचन
कार्यक्रम में संस्थान की दो प्रकाशनों, वार्षिक गृह पत्रिका ‘लाक्षा 2025’ और ‘मधुमक्खी पालन: एक लाभकारी उद्यम’ का विमोचन भी किया गया. डॉ एमएफ अंसारी ने धन्यवाद ज्ञापनकिया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
