1. home Hindi News
  2. state
  3. jharkhand
  4. ranchi
  5. agriculture department in commanding mode farmers of jharkhand will soon get kcc and soil health card smj

कमांडिंग मोड में कृषि विभाग, झारखंड के किसानों को जल्द मिलेगा KCC और Soil Health Card

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
कृषि विभाग की राज्यस्तरीय खरीफ कर्मशाला को संबोधित करते कृषि मंत्री बादल पत्रलेख.
कृषि विभाग की राज्यस्तरीय खरीफ कर्मशाला को संबोधित करते कृषि मंत्री बादल पत्रलेख.
सोशल मीडिया.

Jharkhand News (रांची) : झारखंड के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख ने राज्य के किसानों को संपन्न बनाने पर जोर दिया है. हेमंत सरकार की कोशिश है कि राज्य के 24 लाख किसानों की स्थिति सुदृढ़ हो. नेपाल हाउस स्थित NIC में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला में उन्होंने कहा कि रिकार्ड कृषि उत्पादन की दिशा में राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है. किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने व यूरिया की समयबद्ध सप्लाई के लिए कृषि विभाग ने पूर्व से तैयारी कर रखी थी. अब उसे अमलीजामा पहनाया जा रहा है.

किसानों की कर्ज माफी के लिए बैंकों को दिये 980 करोड़

राज्यस्तरीय कार्यशाला में सभी जिला कृषि पदाधिकारियों और विभाग से जुड़े पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री बादल ने कहा कि अब तक 2 लाख 46 हजार किसानों की कर्ज माफी के लिए बैंकों को 980 करोड़ रुपये कृषि विभाग ने उपलब्ध करा दिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में कृषि विभाग इस बार पूरी तरह से कमांडिंग मोड में है. उम्मीद है कि 5 साल के इस कार्यकाल में सरकार राज्य के 24 लाख किसानों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने में सफलता हासिल करेगी.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में कई क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं और आगामी वर्षों में हम देश के उन चुनिंदा कृषि प्रदेशों में शामिल होंगे, जो कृषि उत्पादन के क्षेत्र में खास स्थान रखते हैं. इस वर्ष समय पर बीज वितरण का कार्यक्रम पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया. साथ ही यूरिया का वितरण भी सभी किसानों के बीच किया जा रहा है.

मंत्री श्री बादल ने कहा कि खरीफ के मौसम में किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रखंडों और जिला स्तर पर जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में कार्यशाला के आयोजन का निर्देश दिया. इससे कृषि से जुड़ी सभी तरह की तकनीकी जानकारी किसानों की सुलभ होगी. उन्होंने निर्देश दिया कि खरीफ उत्पादन के लक्ष्य को 72 लाख मीट्रिक टन से आगे बढ़ा कर 100 लाख मीट्रिक टन करने के उद्देश्य से कार्य करें. वहीं, बीएयू के प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि नई तकनीक और परंपरागत कृषि के संयुक्त प्रयासों से ही हम कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हैं.

कृषकों को योजनाओं का मिले लाभ: अबू बक्कर

कार्यशाला में विभागीय सचिव अबू बक्कर सिद्दिकी ने कहा कि किसानों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिले. इसके लिये पदाधिकारी, कृषि मित्र और जनसेवक किसानों से मिलें और उनकी जरूरतों के मुताबिक कृषि उत्पादन के संसाधन उपलब्ध करायें. जनसेवक अब जिला कृषि पदाधिकारी के अधीन रहेंगे. फसल राहत योजना के तहत किसानों का रजिस्ट्रेशन अवश्य करायें, ताकि फसल का नुकसान होने पर उसकी भरपाई की जा सके.वहीं, हॉर्टीकल्चर के लिए प्रोग्रेसिव किसानों को ई- मार्केटिंग से जोड़ने का निर्देश दिया

कृषि सचिव ने कहा कि खेती योग्य जमीन के दायरे को बढ़ाना है. राज्य में करीब 10 लाख हेक्टेयर के गैप को कम करने की जरूरत पर बल दिया. साथ ही किसानों को मल्टीक्रॉपिंग के लिए प्रोत्साहित करने और उनकी मांग के अनुरूप बीज, खाद और कृषि यंत्र उपलब्ध कराने का प्रयास करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि जिले में अलग-अलग विभागों द्वारा बने तालाब, डैम नहर के अगल बगल की जमीन पर खेती सुनिश्चित करें. वहीं, जरूरत के मुताबिक सिंचाई योजना की रूपरेखा भी तैयार करें.

कृषि सिर्फ व्यवसाय नहीं, संस्कृति है : निशा उरांव

कृषि निदेशक निशा उरांव ने कहा कि कृषि हमारे लिए केवल उद्योग नहीं, बल्कि संस्कृति है. कृषि विभाग का यह प्रयास है कि कृषि के क्षेत्र में पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ वैज्ञानिक पद्धति को भी समावेशित किया जाये. इस बार टोकन के माध्यम से बीज तथा यूरिया का वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है. कृषि जागरूकता के साथ किसानों को पंचायत स्तर तक तकनीकी रूप से जोड़ा जा रहा है. कुल आवंटित 82 हजार मीट्रिक टन इंपोर्टेड यूरिया का 60 फीसदी प्राप्त किया जा चुका है.

उन्होंने बताया कि राज्य में किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए कृषि पाठशाला सह बिरसा गांव योजना शुरू की जा रही है, जिसके तहत किसानों को बागवानी, मत्स्य एवं कृषि से जुड़ी तमाम तकनीकी जानकारी दी जायेगी. इसके अलावा कृषि समृद्धि योजना के तहत सोलर आधारित टपक सिंचाई भी शुरू की जा रही है.

कृषि यांत्रिकीकरण के तहत अब तक 411 महिला समूह चिह्नित किये गये थे, जिनमें से 130 महिला समूहों को 90 प्रतिशत अनुदान पर ट्रैक्टर और रोटावेटर वितरित किये जा चुके हैं. कार्यशाला में पशुपालन निदेशक शशि प्रकाश झा, कृषि उपनिदेशक विजय कुमार, डीडीजी मुकेश कुमार, शिवा महालिंगम, बीएयू से डॉ वदूद, डाॅ लूसिया एवं समिति निदेशक डॉ सुभाष सिंह उपस्थित थे.

Share Via :
Published Date

संबंधित खबरें

अन्य खबरें