छात्राओं की वैज्ञानिक सोच दिखा

By Prabhat Khabar Digital Desk
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संत अन्ना में विज्ञान प्रदर्शनीफोटो सुनील - इंटर में स्मृति खलखो व ग्रुप और उच्च विद्यालय में एली रेखा व ग्रुप अव्वल-पर्यावरण असंतुलन, बढ़ते प्रदूषण, ऊर्जा के वैकल्पिक श्रोत, बांध परियोजनओं के नफा- नुकसान जैसे अनेकों विषयों पर प्रस्तुत किये मॉडल लाइफ रिपोर्टर @रांची संत अन्ना इंटर कॉलेज और उच्च विद्यालय में बुधवार को विज्ञान प्रदर्शनी लगायी गयी. छात्राओं ने अपने वैज्ञानिक सोच व प्रतिभा का परिचय दिया. पर्यावरण असंतुलन, बढ़ते प्रदूषण, ऊर्जा के वैकल्पिक श्रोत, बांध परियोजनाओं के नफा- नुकसान जैसे अनेक विषयों पर मॉडल प्रस्तुत कर अपनी बातों को रेखांकित किया. इंटर में साइंस सेकेंड इयर की स्मृति खलखो व ग्रुप (पवन ऊर्जा) को प्रथम, आर्ट्स सेकेंड इयर की अंकिता व ग्रुप (छत पर खेती) को द्वितीय व कॉमर्स सेकेंड इयर की अनामिका व ग्रुप (बैंकिंग) को तृतीय पुरस्कार से नवाजा गया. निष्ठा टोप्पो व गु्रप को सांत्वना पुरस्कार मिला. उवि केटेगरी में 10 ए की एली रेखा व ग्रुप को पहला,10 बी की जोएता और 10 सी की ममता व ग्रुप को दूसरा और 10 बी की अर्चना गुडि़या व ग्रुप को तीसरा पुरस्कार मिला. सोशल साइंस में सोनाली अग्रवाल प्रथम, राधारानी बेदिया द्वितीय व आयुषि कुमारी व पूजा कुमारी ने तृतीय स्थान हासिल किया. ये सभी 10 ए की छात्राएं हैं. इससे पूर्व कैथोलिक स्कूलों के विद्यालय निरीक्षक फादर हुबर्तुस बेक ने प्रदर्शनी का उदघाटन किया. प्रतिभागियों का मूल्यांकन सरस्वती कुमारी, मेनका शर्मा, अकबर आलम खान व पंकज पांडेय ने किया. सिस्टर शशिलता लकड़ा, सिस्टर निर्मला ज्योति कच्छप उपस्थित थीं.एसिड रेन कॉमर्स 11वीं भावना प्रिया, दीपा कुमारी व ग्रुप ने एसिड रेन मॉडल के माध्यम से दिखाया कि फैक्टरी व वाहनों का उत्सर्जन नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड व अन्य प्रदूषणों को बढ़ावा देता है. इस तरह के प्रदूषण के बढ़ने पर एसिड रेन होती है, जो हमारी आखों, लीवर, किडनी, मस्तिष्क के लिए काफी हानिकारक है. आर्ट्स 11वीं की रूबी लोहरा, निष्ठा व ग्रुप ने बेकार पड़े कार्टून, सूखे नारियल, रद्दी कागज, झाड़ू, पुराने कपड़े, कोल्ड ड्रिंक के ढक्कन आदि से सजावट के सामान प्रदर्शित किया. 12वीं साइंस की वर्षा रानी कुजूर, श्रेया गुप्ता व ग्रुप ने जंगलों के उजड़ने के दुष्प्रभाव की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जनसंख्या वृद्धि से जंगलों पर दबाव बढ़ता है. गृह निर्माण, कल - कारखानों की स्थापना के लिए जंगल उजाड़े जाते हैं. इससे वन्य प्राणियों, जैव विविधता, जैविक संतुलन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ने पर ग्लेशियर पिघलते हैं. इससे समुद्र का जलस्तर बढ़ता है और तटीय इलाकों के डूबने का खतरा बढ़ जाता है. आठ ए की कुसुम कुमारी, ओशिन रोज तिग्गा व ग्रुप ने ड्रिप इरिगेशन तकनीक के बारे में बताया. इसमें कम पानी खर्च कर अधिक क्षेत्र की सिंचाई की जा सकती है. कक्षा नौ सी की मनीषा कुमारी, मरियम माधुरी मिंज ने जैविक खाद के लाभ के बारे में बताया. नौ सी की स्नेहा, सुमन व ग्रुप ने वीडियो प्रजेटेंशन व चार्ट के माध्यम से ग्लोबल वार्मिंग से भयावह भविष्य की तसवीर पेश की.
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