रेलवे प्रोजेक्ट पूरा करने में झारखंड को लगाया जा रहा है चूना (संपादित)

By Prabhat Khabar Digital Desk
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- रेल मंत्रालय ने तीसरी बार दिया स्टीमेट बढ़ाने का प्रस्ताव -एक दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी रेलवे झारखंड के छह में से केवल एक प्रोजेक्ट ही पूरा कर सका विवेक चंद्ररांची. झारखंड में रेलवे प्रोजेक्ट के नाम पर राज्य को जबरदस्त चूना लगाया जा रहा है. राज्य के विभिन्न जिलों में कुल छह रेलवे प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए सरकार 2219 करोड़ रुपये दे चुकी है. खास बात यह है कि वर्ष 2002 में जब प्रोजेक्ट शुरू हुआ, तो कुल 556 किमी रेलवे लाइन बिछाने का स्टीमेट कॉस्ट 1997 करोड़ रुपये ही था. प्रोजेक्ट पूरा नहीं होने के कारण वर्ष 2007 में स्टीमेट बढ़ा कर 3771 करोड़ किया गया था. उसके बाद एक बार फिर से रेलवे ने स्टीमेट बढ़ा कर 5775 करोड़ रुपये कर दिया है. एक दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी रेलवे झारखंड के छह में से केवल एक प्रोजेक्ट ही पूरा कर सका है. बच गये पांच रेलवे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए वर्ष 2016 तक का अवधि विस्तार लिया है. उल्लेखनीय है कि झारखंड में रेल लाइन बिछाने की जिम्मेवारी रेल मंत्रालय की है. झारखंड सरकार का काम रेलवे को राशि उपलब्ध कराने और काम में सहयोग देने का ही है. हिस्सा देने में कंजूसी कर रहा है रेलवेझारखंड में रेल प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अपना हिस्सा देने में रेलवे कंजूसी कर रहा है. वर्ष 2002 में प्रोजेक्ट शुरू होने पर करार हुआ था कि कुल स्टीमेट कॉस्ट का 66.66 फीसदी हिस्सा राज्य वहन करेगा, जबकि शेष 33.33 फीसदी सहायता रेल मंत्रालय द्वारा प्रदान की जायेगी. वर्ष 2007 में स्टीमेट दोगुना बढ़ाने के बाद तय किया गया कि बढ़े स्टीमेट में केंद्र और राज्य सरकार आधा-आधा (50-50) खर्च वहन करेगी. झारखंड अपना हिस्सा हमेशा देता रहा है. अब तक प्रोजेक्ट में कुल 3110.62 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. झारखंड सरकार प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अब तक 2219 करोड़ रुपये रेलवे को उपलब्ध करा चुकी है. यानी, खर्च में रेल मंत्रालय का हिस्सा केवल 891.62 करोड़ रुपये ही है. मुफ्त में जमीन मांगती है रेलवे रेलवे झारखंड सरकार से रेल प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए मुफ्त में जमीन मांगती है. बरवाडीह-अंबिकापुर परियोजना के लिए रेलवे ने मुफ्त में जमीन मांगी है. रेल परियोजना पूरी करने के लिए राज्य के पलामू जिले की 203 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करना होगा. अधिग्रहण के लिए जमीन मालिकों को 26.69 करोड़ रुपये चुकाने होगे. हालांकि राज्य सरकार ने यह साफ कर दिया है कि रेलवे को मुफ्त जमीन नहीं दी जा सकती है. सरकार की ओर से कहा गया है कि उक्त कार्य के लिए राशि का बजट प्रावधान नहीं किया गया है. राज्य की वित्तीय स्थिति भी अच्छी नहीं है. इस वजह से जमीन रेलवे को मुफ्त नहीं दी जा सकती है. जमीन अधिग्रहण के लिए रेल मंत्रालय को पहल करनी होगी. झारखंड सरकार ने रेल मंत्रालय को पूर्व की तरह काम करने का सुझाव दिया है. मालूम हो कि राज्य से होकर गुजरने वाली या राज्य की रेल परियोजनाओं के लिए रेल मंत्रालय द्वारा राशि प्रदान की जाती रही है. कहां-कहां बिछनी है रेल लाइनप्रोजेक्ट का नाम दूरी (किमी में)रांची-बड़काकाना-हजारीबाग-कोडरमा 200रांची-लोहरदगा (टोरी तक विस्तार) 113कोडरमा-तिलैया 14कोडरमा-गिरिडीह 105देवघर-दुमका 60दुमका-रामपुरहाट 64कुल 556क्या है हाल रेल प्रोजेक्टों काप्रोजेक्ट का नाम स्थितिरांची-बड़काकाना-हजारीबाग-कोडरमा 129 किमी रेल लाइन बिछाने का काम बचा है. रांची-लोहरदगा (टोरी तक विस्तार) रेल लाइन बिछाने के लिए 11 बड़े पुल और 28 छोटे पुल नहीं बने हैं.कोडरमा-तिलैया आठ किमी रेल लाइन बिछाने का काम बचा है. मार्च 2015 तक होने की उम्मीद.कोडरमा-गिरिडीह सीसीएल के कारण रूट बदला. दूसरे रूट से ट्रेन सेवा शुरू करने की सलाहदेवघर-दुमका प्रोजेक्ट पूरा. 2011 से मार्ग पर रेल परिवहन शुरू दुमका-रामपुरहाट 30 किमी रेल लाइन बिछाना शेष.
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