केंद्र ने घटाया बजट, मजदूरों को नहीं मिलेगा रोजगार (संपादित)

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मनरेगा लेबर बजट घटा कर 1391 करोड़ से 791 करोड़ किया- योजनाओं की संख्या भी घटानी पड़ेगीप्रमुख संवाददातारांची : झारखंड के मनरेगा मजदूरों को इस साल 100 दिनों का रोजगार नहीं मिल सकेगा. जिन्होंने रोजगार मांगा है, उसे भी 100 दिनों का उपलब्ध नहीं कराया जा सकेगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने मनरेगा का लेबर बजट घटा कर 1391 करोड़ रुपये से 791 करोड़ रुपये कर दिया है. यानी करीब 600 करोड़ रुपये लेबर बजट घटा दिया गया है. 100 दिनों की रोजगार की बात तो दूर, अब 50 दिनों का रोजगार देना भी आफत है. फिलहाल झारखंड के 7,88,283 मजदूरों ने रोजगार की मांग की है. झारखंड सरकार इसे लेकर चिंतित है कि यदि झारखंड के कुल 40 लाख मजदूर रोजगार की मांग करते हैं, तो सरकार के सामने संकट हो जायेगी. इतने मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा.योजनाओं पर भी नहीं होगा कामइस वित्तीय वर्ष में मनरेगा से योजनाएं लेना भी संभव नहीं होगा. सरकार ने इस वित्तीय वर्ष 138662 योजनाएं ली थी. अधिकतर योजनाओं पर काम नहीं हुआ है. 1391 करोड़ का बजट मान कर योजनाएं ली गयी थी. अब बजट घट गया है. ऐसे में योजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं होगा. योजनाएं कम करनी होगी. वहीं कुछ योजनाएं राशि के अभाव में लटक भी सकती है. मजदूरों का होगा पलायनअगर यही स्थिति रही, तो रोजगार के अभाव में मजदूरों का पलायन होगा. झारखंड में मजदूरों की बड़ी आबादी मनरेगा पर निर्भर है. ऐसे में उन्हें अपना गांव छोड़ कर दूसरे जगहों पर रोजगार के लिए जाना होगा. मनरेगा मे काम करने से मजदूरों को 158 रुपये प्रति दिन के हिसाब से मिलते हैं. अपने ही गांव में इतनी राशि मिल जाती है, तो उनका गुजर-बसर हो जाता है. क्यों कम किया बजटसूचना के मुताबिक, केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों का भी बजट कम किया है. इसके तहत झारखंड के बजट में भी कटौती की जा रही है. राशि कम होने का हवाला देकर ऐसा किया जा रहा है. पिछली बार 1600 करोड़ का था प्रावधानपिछले वित्तीय वर्ष यानी 2013-14 में मनरेगा लेबर बजट की राशि 1600 करोड़ रुपये की थी. वहीं केंद्र सरकार ने यह व्यवस्था की थी कि जितनी भी राशि झारखंड खर्च करेगा, उसे दी जायेगी. मंत्री त्रिपाठी ने केंद्रीय मंत्री को लिखा है पत्रबजट कम कर देने के मामले को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है. राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री केएन त्रिपाठी ने इस संबंध में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री को पत्र भी लिखा है. उनसे आग्रह किया गया है कि बजट को कम नहीं किया जाये. क्योंकि विभाग को पहले से तय बजट से भी ज्यादा राशि चाहिए. ऐसे में विभाग का बजट बढ़ाया जाये.
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