संसद के अंदर और बाहर उठा झारखंड में नरसंहार का मुद्दा, सांसदों ने किया प्रदर्शन

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची/नयी दिल्ली : देश की विपक्षी पार्टियां संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (NRC) के विरोध में देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रही हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने बुधवार को चाईबासा में हुए नरसंहार के विरोध में प्रदर्शन किया. झारखंड और पश्चिम बंगाल के भाजपा सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर संसद परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरना दिया और गुदड़ी नरसंहार के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की.

सांसदों के हाथ में जो तख्तियां थीं, उस पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ नारे लिखे थे. इस पर लिखा गया : आदिवासियों की हत्यारी राहुल-हेमंत सरकार. एक और तख्ती पर लिखा था : गुदड़ी (झारखंड) में आदिवासियों का नरसंहार, हाय-हाय कांग्रेस-जेएमएम सरकार.

झारखंड के भाजपा सांसदों के हाथों में जो तख्तियां थीं, वह कांग्रेस, राहुल गांधी और सोनिया गांधी से सवाल भी कर रही थीं. तख्तियों के जरिये सांसदों ने पूछा : आदिवासियों की हत्या पर राहुल-सोनिया चुप क्यों? इस प्रदर्शन में रांची के सांसद संजय सेठ, पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम, कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी, हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा और गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे समेत एक दर्जन से अधिक सांसदों ने भाग लिया.

प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल के सांसद भी शामिल हुए. उल्लेखनीय है कि पश्चिमी सिंहभूम जिला में स्थित चाईबासा के गुदड़ी में कथित पत्थलगड़ी के मामले में 7 आदिवासियों की जंगल में ले जाकर गला रेतकर हत्या कर दी गयी थी. भाजपा का आरोप है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के गठबंधन की सरकार इस मामले को दबा रही है. भाजपा सांसदों ने कहा कि पड़ोसी देशों में प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने वाले कानून का विरोध किया जा रहा है.

सांसदों ने कहा कि विपक्षी दल ऐसे एनआरसी कानून का विरोध कर रही है, जो अभी तक आया ही नहीं. कांग्रेस को मुस्लिमों की चिंता है, लेकिन झारखंड में एक साथ सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. चाईबासा के गुदड़ी में इतना बड़ा नरसंहार हो गया, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं ने इस विषय पर अब तक एक शब्द नहीं कहा. चुनाव के पहले ये लोग आदिवासियों के बड़े हितैषी बने फिर रहे थे, लेकिन जब उनकी हत्या हो रही है, तो हेमंत सोरेन, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और तमाम बड़े नेता चुप बैठे हैं.

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