रांची : पावर प्लांटों से हो रहे प्रदूषण की जांच का जिम्मा सिंफर को

छह माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट देनी होगी रांची : राज्य के 27 थर्मल पावर प्लांटों से हो रहे प्रदूषण से उत्पन्न होनेवाले खतरों की जांच को लेकर हाइकोर्ट में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई करते […]

छह माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट देनी होगी
रांची : राज्य के 27 थर्मल पावर प्लांटों से हो रहे प्रदूषण से उत्पन्न होनेवाले खतरों की जांच को लेकर हाइकोर्ट में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई.
चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए पूर्व में गठित पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति को भंग कर दिया. साथ ही जांच की जिम्मेवारी केंद्रीय खनन और फ्यूल रिसर्च संस्थान (सिंफर) धनबाद को साैंप दिया. खंडपीठ ने सिंफर को निर्देश दिया कि वह छह माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट दे. दो माह के अंदर अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाये. इस कार्य के लिए सरकार 25 लाख रुपये सिंफर को दे.
आधी राशि काम शुरू करने के पहले व शेष राशि 12.50 लाख रुपये जांच पूरी होने के बाद भुगतान की जाये. इससे पूर्व सुनवाई के दौरान सिंफर के निदेशक की ओर से बताया गया कि थर्मल पावर पल्ांटों के प्रदूषण की जांच करने में सिंफर स्वयं सक्षम है. उल्लेखनीय है कि थर्मल पावर प्लांटों के प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए झारखंड हाइकोर्ट ने स्वत: संज्ञान से मामले को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था. पूर्व में हाइकोर्ट के आदेश के आलोक में पांच सदस्यीय जांच समिति बनायी गयी थी, लेकिन एक प्लांट को छोड़ कर 27 प्लांटों की अब तक जांच नहीं हो पायी थी. हाइकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए समिति के सदस्यों को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया था.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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