रांची : मेधा डेयरी के सफल संचालन के लिए झारखंड सरकार और एनडीडीबी के बीच एक मार्च 2014 को एमओयू हुआ था. 31 मार्च 2019 को एमओयू की अवधि समाप्त हो गयी. एमओयू खत्म होने के बाद से कई काम प्रभावित हो रहे हैं. पलामू, सारठ और साहेबगंज में नयी डेयरी शुरू होनेवाली है. जबकि गिरिडीह और जमशेदपुर में भी नयी डेयरी शुरू की जानी है.
यह हो रही परेशानी : प्रबंधन कोई भी बड़ा निर्णय नहीं ले पा रहा है. फंड की भी कमी हो रही है. जल्द ही नयी डेयरी शुरू की जानी है, इसके लिए नयी बहाली भी नहीं हो पा रही है.
अलग-अलग कारणों से नहीं हो पाया एमओयू : हेमंत सरकार के समय ही प्रारंभ में 2014 में एमओयू हुआ था. एमओयू के बाद झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ का प्रबंधन एनडीडीबी को सौंप दिया गया.
एमओयू की पांच साल की अवधि खत्म होने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दो अप्रैल 2019 को एनडीडीबी के चेयरमैन से कम-से-कम और दो साल संचालन का आग्रह किया था. इसके बाद अलग-अलग कारणों से एमओयू का काम पूरा नहीं हो पाया. एमआेयू नहीं होने से झारखंड के दुग्ध किसान चिंतित हैं. हालांकि नयी सरकार से उन्हें उम्मीद जगी है.
काफी आगे बढ़ चुका है मेधा डेयरी : 25 जुलाई 2014 को मदर डेयरी-मेधा ब्रांड की लांचिंग हुई थी. आज मेधा डेयरी अपनी उत्पादों की गुणवत्ता से काफी आगे बढ़ चुका है.
दूध के अलावा लस्सी, पेड़ा, पनीर, घी, दही, मीठा दही, फ्लेवर्ड दूध पाउच, आम दही, मट्ठा बाजार में मिल रहे हैं. टर्नओवर भी काफी बढ़ गया है. 2014-15 में टर्नओवर 20.50 करोड़ रुपये था, 2018-19 में टर्नओवर बढ़ कर 173.50 करोड़ रुपये हो गया.
हेमंत सरकार के समय ही 2014 में हुआ था एमओयू
एमओयू नहीं होने से झारखंड के दुग्ध
किसान हैं चिंतित
झारखंड में चार जगहों पर है डेयरी
झारखंड में चार जगहों होटवार, देवघर, कोडरमा और लातेहार में मेधा डेयरी है. होटवार डेयरी से रांची, धनबाद, हजारीबाग, जमशेदपुर, चतरा एवं बोकारो में उत्पादों की आपूर्ति की जाती है.
कोडरमा डेयरी से कोडरमा, गिरिडीह एवं बिहार का नवादा और देवघर डेयरी से भागलपुर, देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा एवं बिहार का बांका और लातेहार डेयरी से लोहरदगा, लातेहार, पलामू और गढ़वा की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है. हर दिन औसतन 1.10 लाख लीटर दूध की बिक्री हो रही है. वहीं, 562 दुग्ध संग्रहण केंद्र के माध्यम से औसतन हर दिन 1.25 लाख किलो दूध का संग्रहण किया जा रहा है.
