रांची : आमतौर पर अपराधी चोरी के वाहन में दूसरी गाड़ियों के नंबर का इस्तेमाल कर अपने काम को अंजाम देते हैं, लेकिन प्रशासन के लोग ही अगर इस तरह का काम करेंगे, तो क्या कहेंगे. कुछ ऐसा ही मामला शनिवार को रांची के सिद्दो कान्हू पार्क से कुछ दूरी पर स्थित एसएन टावर के समीप देखने को मिला.
वहां से गुजर रहे ज्ञादित्य सिंह नामक व्यक्ति ने देखा कि सफेद रंग की बोलेरो पर जेएच-01एइ-9153 नंबर लिखा हुआ है. उसको शक हुआ कि ऐसा कैसे हो सकता है. उसने बताया कि वह कचहरी के समीप रहनेवाले कुणाल शाह नामक व्यक्ति की बोलेरो चलाता है, यह उसी गाड़ी का नंबर है. वह गाड़ी पिछले छह माह से गैरेज में है. इस संबंध में उसके स्तर से पुलिस को सूचना दी गयी.
मौके पर लालपुर और गोंदा थाना की पुलिस पहुंची. पुलिस की जांच में यह बात सामने आयी कि नारकोटिक्स ब्यूरो के अफसरों द्वारा छापेमारी में जिस विभागीय बोलेरो का इस्तेमाल किया जा रहा था उस पर लगा नंबर जेएच-01एइ-9153 कुणाल शाह की बोलेरो का है. इस बात को नारकोटिक्स के अफसर ने भी स्वीकार किया. हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच मामला सलट गया. लेकिन सवाल अपने जगह पर कायम रहा कि नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम ने जो भी किया क्या वह सही था या है?
कचहरी निवासी कुणाल शाह की बोलेरो गाड़ी छह माह से गैरेज में है
उनकी गाड़ी के नंबर का यूज कर रहे थे नारकोटिक्स के अफसर
कुणाल के चालक ने दूसरी बोलेरो में देखा नंबर तब हुआ खुलासा
विभागीय बोलेरो से लगातार अफीम और मादक पदार्थ के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ अभियान चल रहा था. इस वजह से उसका नंबर सभी जान गये थे. चतरा में एक ऑपरेशन के लिए एक दूसरे बोलेरो के नंबर का उपयोग किया गया था. ऐसा तस्करों को पकड़ने के लिए किया गया था. किसी को नुकसान पहुंचाने की मंशा नहीं थी.
-सुरेश सिंह, एसपी, नारकोटिक्स ब्यूरो
