पश्चिम बंगाल के मानभूम में थी चास और चंदनकियारी विधानसभा सीट
रांची : देश के पहले चुनाव में चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र का नाम चास-चंदनकियारी-रघुनाथपुर-पाड़ा था. उस समय पश्चिम बंगाल के मानभूम जिला के अंतर्गत था. इस सीट पर यहां के काशीपुर पंचकोर्ट स्टेट के महाराजा शंकरी प्रसाद सिंह देव पहले विधायक थे.
काशीपुर उस समय मानभूम में था और अब पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला में है. 1956 में बिहार- बंगाल के विभाजन के बाद भी यह सीट अनारक्षित थी. 1952 में हुए देश के पहले चुनाव में चास-चंदनकियारी-रघुनाथपुर-पाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे काशीपुर महाराजा शंकरी प्रसाद सिंहदेव. उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीता था.
उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे निकटतम प्रतिद्वंद्वी हरदयाल शर्मा को हराया था. लेकिन, विधायक बनने के छह महीने बाद ही महाराजा का निधन हो गया. इसके बाद हुए उपचुनाव में महाराजा शंकरी प्रसाद के पुत्र भुवनेश्वरी प्रसाद सिंहदेव को कांग्रेस ने मैदान में उतारा. मुकाबला हरदयाल शर्मा से ही था. इस बार हरदयाल जीत गये. जीत का अंतर 500 वोट से भी कम रहा. 1957 के चुनाव में हरदयाल शर्मा दोबारा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते. उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पार्वती चरण महतो को हराया था.
लेकिन, अगले चुनाव 1962 में कांग्रेस ने हरदयाल शर्मा की जगह कुतुबद्दीन अंसारी को चास का टिकट दिया. कुतुबद्दीन इस बार स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर लड़ रहे पार्वती चरण महतो से हार गये. 1967 से यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दी गयी. चंदनकियारी आरक्षित सीट से शशि बाउरी पहले विधायक बने. 1972 में चास और चंदनकियारी (धनबाद जिला) को मिलाकर चंदनकियारी विधानसभा सीट और रघुनाथपुर और पाड़ा (पश्चिम बंगाल) को मिला कर पाड़ा आरक्षित सीटों का गठन किया गया.
