मनोज सिंह
पांच ऐसी सीट जहां तीन दशक से एक ही दल या प्रत्याशी का रहा है दबदबा
रांची : राज्य में पांच विधानसभा सीट ऐसी है, जहां जनता का विश्वास पिछले 30 साल से नहीं डिग पा रहा है. इस दौरान इसमें से कुछ सीटों पर प्रत्याशी भी बदले, लेकिन जनता का उस दल के प्रति विश्वास नहीं टूट पाया.
इसमें दो सीटें संताल परगना, एक कोल्हान और दो सीट दक्षिणी छोटानागपुर की है. संताल परगना के लिट्टीपाड़ा और शिकारीपाड़ा सीट पर पिछले तीन दशक से एक ही दल का प्रत्याशी जीतता आ रहा है. इसी तरह कोल्हान के जमशेदपुर पूर्वी सीट और दक्षिणी छोटानागपुर के कांके और रांची सीट की भी यही स्थिति है. लिट्टीपाड़ा और शिकारीपाड़ा से 1985 से झारखंड मुक्ति मोरचा जीतता आ रहा है. इसी तरह कांके और रांची सीट से भाजपा लगातार जीत रही है. यही स्थिति वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास के जमशेदपुर पूर्वी सीट की है.
जमशेदपुर पूर्वी, रांची, कांके, लिट्टीपाड़ा और शिकारीपाड़ा विधानसभा सीट में रहा है एक ही दल का दबदबा
सुशीला और साइमन के बाद डॉ अनिल मुर्मू
लिट्टीपाड़ा सीट से 1985 में पहली बार झामुमो ने जीता था. इसके बाद से यह सीट 1990, 1995, 2000, 2005 और 2014 तक झामुमो के कब्जे में है. 1985 में पहली बार सुशीला हांसदा जीती थीं. 2005 तक वह लगातार इस सीट से वह जीतती रहीं. 2009 में झामुमो ने उनके पति साइमन मरांडी को उतारा गया था. वह भी चुनाव जीते थे. 2014 डॉ अनिल मुर्मू (अब स्वर्गीय) विजयी हुए थे. इस चुनाव में सुशीला हांसदा के पति साइमन मरांडी भाजपा के प्रत्याशी थे. वह हार गये थे. डॉ मुर्मू के निधन के बाद साइमन झामुमो के टिकट पर जीत गये.
पार्टी का मन बदला, जनता का नहीं
कांके विधानसभा सीट पर भी पिछले 30 साल से भाजपा का ही कब्जा है. इस सीट पर भाजपा ने तीन बार प्रत्याशी भी बदला, लेकिन जनता का भाजपा से विश्वास नहीं डिग पाया. 1990 में पहली बार इस सीट से रामचंद्र बैठा जीते थे. बैठा 1995 में भी जीते. बाद में पार्टी ने प्रत्याशी बदल कर 2000 में रामचंद्र नायक को टिकट दे दिया. श्री नायक को भी यहां की जनता ने सदन भेजा. 2005 और 2009 में फिर पार्टी ने बैठा पर विश्वास किया. जनता ने फिर बैठा को जिताया. 2014 में पार्टी ने डॉ जीतू चरण राम को टिकट दिया. जनता ने श्री राम को भी विधायक बनाया.
35 साल से अजेय हैं नलिन
झारखंड मुक्ति मोरचा के नेता नलिन सोरेन पिछले 35 साल से अजेय हैं. 1985 से लगातार पर वह इस सीट से जीत रहे हैं. इस दौरान विपक्षी दलों ने कई प्रत्याशी बदले, लेकिन विजेता नहीं बदल पाये. हर बार नलिन क्षेत्र की जनता के विश्वास पर खरा उतरते रहे.
गुलशन से शुरू हुई थी भाजपा की विजय यात्रा
रांची विधानसभा सीट से सबसे पहले बिहार विधानसभा के लिए गुलशन आजमानी 1990 में जीते थे. इससे पूर्व यहां से कांग्रेस जीती थी. 1995 में भाजपा के यशवंत सिन्हा जीते. इसके बाद अब तक श्री सिंह रांची के विधायक हैं.
जमशेदपुर पूर्वी यानी रघुवर दास : जमशेदपुर पूर्वी सीट भी पिछले 30 साल से एक ही पार्टी के पास है. 1990 में दीनानाथ पांडेय यहां से भाजपा के विधायक चुने गये थे. 1995 में श्री पांडेय के स्थान पर पार्टी ने रघुवर दास को प्रत्याशी बनाया. इसके बाद से भाजपा पर जनता का भरोसा लगातार बना हुआ है.
