रांची : राजनीति को रंग बदलने का खेल माना जाये, तो प्रकाश राम रंगीला हैं. लातेहार विधानसभा सीट से दो बार चुनाव जीतने वाले प्रकाश राम ने 1990 का विधानसभा चुनाव भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (भाकपा) के प्रत्याशी के तौर पर लड़ा था. 1995 तक वह इसी लाल झंडेवाली पार्टी के वह झंडाबदार थे. लाल रंग के साथ प्रकाश की लोकप्रियता भी उस दौरान फीकी पड़ी थी. वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव में उन्हें 6090 मत मिले थे, तो 1995 के चुनाव में सिर्फ 3402.
तब इनका स्थान वोटों की संख्या के आधार पर पांचवां था. इसके बाद प्रकाश ने खुद को लालटेन से प्रकाशमान करने की ठानी. वह राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हो गये. पहली ही बार में ही उनकी लॉटरी लग गयी. लालटेन धधक उठा. सिर्फ 18819 वोट पाकर प्रकाश राम विधायक बन गये. पर 2009 के चुनाव में उन्हें बैजनाथ राम से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा. भाई साहब को लगा कि यही किस्मत कहीं दोहरा न जाये. चुनावी आकलन करते हुए उन्होंने बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का दामन थाम लिया.
आकलन सही रहा तथा 2014 के चुनाव में 71160 वोट पाकर वह फिर विधायक बन गये. अब 2019 के चुनाव से ठीक पहले प्रकाश राम को लगा कि उगते सूर्य को आरती दिखाने में समझदारी है. चुनाव का डर-भय दूर भगाने के लिए प्रकाश राम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली है.
