सुनिए झारखंड के नायकों को : छऊ से है झारखंड की पहचान फिर भी कलाकारों की उपेक्षा

पद्मश्री मंगलाचरण मोहंती झारखंड की प्राचीन संस्कृति, भाषा की पहचान छऊ की विभिन्न शैली से होने के प्रमाण इतिहास के पन्नों में दर्ज तो हैं. लेकिन अलग राज्य झारखंड में इसके संरक्षण के लिए पिछले 19 वर्षों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, यह भी सच है. इसे बचाने और आगे बढ़ाने की नैतिक […]

पद्मश्री मंगलाचरण मोहंती
झारखंड की प्राचीन संस्कृति, भाषा की पहचान छऊ की विभिन्न शैली से होने के प्रमाण इतिहास के पन्नों में दर्ज तो हैं. लेकिन अलग राज्य झारखंड में इसके संरक्षण के लिए पिछले 19 वर्षों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, यह भी सच है. इसे बचाने और आगे बढ़ाने की नैतिक व प्राथमिक जिम्मेवारी सरकार की है, दुर्भाग्य की बात है कि यह सरकार की प्राथमिकता में शामिल नहीं है.
इस कारण छऊ और छऊ करने वाले कलाकार उपेक्षित हैं. आज जरूरत है कि प्रदेश के मंत्री, विधायक, सांसद के साथ सभी राजनीतिक दलों के नेता इसे गहराई से समझें और उसे मुख्यधारा में लाने का काम करें, ताकि राज्य के अंदर विलुप्त हो रही प्राचीन परंपरा और संस्कृति को बचाने के साथ आगे की पीढ़ी को बेहतर धरोहर सौंपा जा सके, ऐसा करने से ही छऊ नृत्य और कलाकारों की स्थिति में सुधार हो सकेगा.

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