रांची : केंद्रीय सूचना आयोग के निदेशक पंकज केपी श्रेयस्कर ने कहा है कि बेहतर शासन के लिए सरकार और नागरिकों के बीच एकीकृत और दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति जरूरी है. कानून का शासन, जवाबदेही और पारदर्शिता के नियम कुछ स्तरों पर तकनीकी और कानूनी लगते हैं, लेकिन इनके आपसी समन्वय से एक ऐसी सरकार का निर्माण होता है, जो व्यापक रूप से नागरिकों द्वारा समर्थित होती है. साथ ही सरकार में सकारात्मक भूमिका निभानेवाले सामाजिक संगठनों का व्यापक समर्थन मिलता रहता है.
श्री श्रैयस्कर सोमवार को केंद्रीय विवि में पारदर्शिता अौर शासन विषय पर व्याख्यान दे रहे थे. उन्होंने कहा कि सुशासन न केवल प्रतिबद्ध नेतृत्व द्वारा संचालित लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का परिणाम है, बल्कि समाज में समूहों और हितों की भागीदारी, उनके विवादों की प्रक्रियाएं एवं प्रभावी संस्थाओं, जो निरंतर वैध और संयमित होने पर ही सबसे प्रभावी होती हैं, के परिणाम हैं. पारदर्शिता व जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित विश्वसनीय और भरोसेमंद संस्थाओं की आवश्यकता सुशासन के लिए होती है.
पिछले कुछ वर्षों में यह महसूस किया जाता रहा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा चार का कमजोर कार्यान्वयन आंशिक रूप से इस धारा के कतिपय उपबंधों का पूरी तरह से विस्तृत विवरण नहीं देने के कारण हुआ है. इसे सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र अनुपालन तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है. इस मौके पर कुलसचिव एसएल हरि कुमार, प्रो सारंग मेढकर, डीएसडब्ल्यू डॉ मनोज कुमार,डॉ रत्नेश विश्वकसेन, सुजीत कुमार पांडे आदि मौजूद थे.
