अजय दयाल
रांची : कांके रोड स्थित पुलिस लाइन में पुलिसकर्मी खानाबदोश की जिंदगी जीने को मजबूर है़ं यहां जिला के पांच हजार पुलिसकर्मी रहते हैं. इन पुलिसकर्मियों के रहने के लिए कुल चार बैरक बनाये गये हैं.
इन चार बैरकों में कुल 1200 पुलिसकर्मियों के रहने की व्यवस्था है. लगभग 1200 पुलिसकर्मियों को इन बैरकों में ठिकाना तो मिल गया है, लेकिन बाकी के चार हजार पुलिसकर्मियों को बैरक के पीछे खाली पड़े मैदान में टेंट लगा कर रहना पड़ रहा है. एक टेंट में 12-15 पुलिसकर्मी रहते हैं.
जमीन पर टेंट बने रहने के कारण बरसात के दिनों के यहां हमेशा सांप-बिच्छू के आने का डर बना रहता है. पुलिसकर्मियों की ज्यादा संख्या को देख कर शहीद रमुल सावैया सभागार को भी पुलिसकर्मियाें के रहने का ठिकाना बना दिया गया है. यहां भी क्षमता से अधिक पुलिसकर्मी रह रहे है़ं
पुलिस लाइन. खानाबदोश की जिंदगी जीने को मजबूर हैं पुलिसकर्मी
छुट्टी नहीं मिलने से तनाव में रहते हैं पुलिसकर्मी
पुलिसकर्मियों का कहना है कि हमलोग तो जैसे-तैसे यहां दिन काट रहे हैं. लेकिन सबसे बड़ी समस्या हमलोगों की छुट्टी नहीं मिलने की है. छुट्टी नहीं मिलने के कारण ज्यादातर पुलिसकर्मी हमेशा तनाव में रहते हैं. उनका कहना है कि परिजनों के बीमार रहने और अन्य जरूरी काम होने की स्थिति में छुट्टी मांगने पर अवकाश में कटौती कर दी जाती है. सात दिनों की छुट्टी मांगने पर सिर्फ तीन दिनों की छुट्टी दी जाती है. इस विषय पर अफसरों को ध्यान देना चाहिए़
एक किचन प्लाजा से नहीं चल रहा है काम, दो और शीघ्र खोले जायेंगे
पुलिस लाइन में एक किचन प्लाजा है, जिसमें 50 पुलिसकर्मियों के खाने के लिए कुर्सी-टेबल लगा है. किचन प्लाजा में पुलिसकर्मियों को 35 रुपये में एक टाइम का खाना मिलता है. यहां सिर्फ शाकाहारी भोजन बनाया जाता है. लगभग पांच हजार पुलिसकर्मियों को खाना बनाने में इस किचन प्लाजा में परेशानी हो रही है. इस कारण सिटी कंट्राेल रूम में शीघ्र ही एक किचन प्लाजा की शुरुआत होगी. जबकि तीसरा किचन प्लाजा भी जगह तय कर शीघ्र खोला जायेगा़
