रांची : वन क्षेत्र खाली करा कर कॉरपोरेट घरानों को देने की तैयारी : झामुमो

वनाधिकार कानून 1927 के प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ झामुमो ने राजभवन के समक्ष दिया धरना रांची : वनाधिकार कानून 1927 में प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से सरकार आदिवासियों-मूलवासियों को वन क्षेत्र से भगा कर उस जमीन को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने की साजिश रच रही है. उक्त बातें झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने […]

वनाधिकार कानून 1927 के प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ झामुमो ने राजभवन के समक्ष दिया धरना
रांची : वनाधिकार कानून 1927 में प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से सरकार आदिवासियों-मूलवासियों को वन क्षेत्र से भगा कर उस जमीन को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने की साजिश रच रही है. उक्त बातें झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने सोमवार को झामुमो द्वारा राजभवन के समक्ष आयोजित धरना को संबोधित करते हुए कही. पार्टी ने वन अधिकार कानून का कड़ाई से अनुपालन करने की मांग की.
हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासियों को वन भूमि से बेदखल करना दुर्भाग्यपूर्ण है.
इसे झामुमो कभी कामयाब नहीं होने देगा. उन्होंने कहा कि कानून की आड़ में वनों से यहां के आदिवासियों और मूलवासियों को बेदखल किया जायेगा़ सरकार इन्हीं जंगलों को बाद में कॉरपोरेट घरानों को बेच देगी. धरना के बाद हेमंत सोरेन की अगुवाई में झामुमो का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिला और उनके माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में पांच मुख्य बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए आदिम जनजाति, आदिवासी-मूलवासी को चिह्नित कर उनको जमीन का राजस्व पट्टा और मालिकाना हक देने की मांग की गयी है.
पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपई साेरेन ने कहा कि 1927 के वनाधिकार कानून में संशोधन कर सरकार वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अधिकारों पर गंभीर चोट करने जा रही है. इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. जरूरत पड़ी, तो हम सड़कों पर उतर कर आंदोलन करेंगे. धरना में दीपक बिरूआ, स्टीफन मरांडी, महुआ माजी, अमित महतो, विनोद कुमार पांडे आदि शामिल हुए.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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