लोकसभा चुनाव : झारखंड में 95 व देश भर में 3442 निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में, जानें कुछ खास बातें
संजयरांची : चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार न हों, तो लोकतंत्र की चमक फीकी पड़ जाये. चुनावी मैदान में दम ठोंकते इन्हीं लोगों की बदौलत लोकतंत्र सबके लिए का भाव गाढ़ा होता है. झारखंड के 14 लोकसभा सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया में कुल 95 प्रत्याशी निर्दलीय हैं. इनमें से एक जय प्रकाश प्रसाद […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
संजय रांची : चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार न हों, तो लोकतंत्र की चमक फीकी पड़ जाये. चुनावी मैदान में दम ठोंकते इन्हीं लोगों की बदौलत लोकतंत्र सबके लिए का भाव गाढ़ा होता है. झारखंड के 14 लोकसभा सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया में कुल 95 प्रत्याशी निर्दलीय हैं.
इनमें से एक जय प्रकाश प्रसाद भी हैं, जो सातवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं. इन महाशय का हौसला इसी से समझा जा सकता है कि 2014 के चुनाव में यह नरेंद्र मोदी को टक्कर देने वाराणसी पहुंच गये थे. संदेश साफ है कि हमारे पास खोने को कुछ नहीं, पर पाने को सारा जहां हैं.
पर इस महंगाई में 25 हजार रु की जमानत राशि गंवाने को तैयार रहना भी कम साहस नहीं है. कुछ इसी तर्ज पर टाटीसिलवे (रांची) के एक निर्दलीय उम्मीदवार कामेश्वर साहू ने भी रांची सीट से लोकसभा चुनाव का परचा भरा था, जो खुशकिस्मती या बदकिस्मती से रद्द हो गया. श्री साहू ने कहा था कि भले 25 हजार रु डूब जायें, पर मेरा शौक है, मैं चुनाव लड़ूंगा.
राज्य गठन के बाद वर्ष 2004, 2009 व 2014 में हो चुके तीन लोकसभा चुनावों में क्रमश: 71, 100 व 76 निर्दलीय लोग चुनावी दंगल में थे, जिनमें से ज्यादातर की जमानत राशि जब्त हो गयी थी.
वर्ष 2009 का लोकसभा चुनाव इस मायने में महत्वपूर्ण रहा था कि इस चुनाव में कुल 100 में से तीन निर्दलीय जमानत बचाने में कामयाब रहे़ चतरा से निर्दलीय प्रत्याशी इंदर सिंह नामधारी ने तो बाकायदा जीत हासिल की थी. उन्होंने इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी धीरज साहू को हराया था. अब 2019 में जनता इन निर्दलीयों के साथ क्या सलूक करती है, यह देखना होगा. जीत न सही, विभिन्न लहरों के बीच जमानत बचा पाना भी बड़ी उपलब्धि होगी.
विभिन्न लोकसभा चुनावों में निर्दलीयों का हाल
लोकसभा चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी जमानत बची/जीते जमानत जब्त