चालीसा का पुण्यकाल- 19 : ईश्वर की दया और क्षमा पर विश्वास करें

मुंबई से दुबई जाने वाले एक हवाई जहाज ने सांताक्रूज हवाई अड्डे से उड़ान भरी. अभी कुछ ही मिनट हुए थे कि पायलट को मालूम चला कि हवाई जहाज के इंजन में कुछ खराबी आ गयी है़ मजबूरन उसने हवाई जहाज को वापस मोड़ा और लगभग आधे घंटे के अंतराल पर सांताक्रूज हवाई अड्डे पर […]

मुंबई से दुबई जाने वाले एक हवाई जहाज ने सांताक्रूज हवाई अड्डे से उड़ान भरी. अभी कुछ ही मिनट हुए थे कि पायलट को मालूम चला कि हवाई जहाज के इंजन में कुछ खराबी आ गयी है़ मजबूरन उसने हवाई जहाज को वापस मोड़ा और लगभग आधे घंटे के अंतराल पर सांताक्रूज हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करायी़ यात्रियों की प्रतिक्रिया अलग-अलग थी़
कुछ ने राहत की सांस ली, तो कुछ एयरलाइंस को कोस रहे थे़ यात्रियों में से एक ने पायलट से पूछा कि कितनी दूर चले जाने के बाद वापस लौटने की संभावना खत्म हो जाती है? पायलट ने बताया कि हम रूट मैप में एक जगह निश्चित कर के वहां लाल पेन से लिख लेते हैं- पीएनआर, अर्थात प्वाइंट ऑफ नो रिटर्न.
यानी उस बिंदु से हम वापस नहीं लौट सकते़ हमें आगे बढ़ते ही रहना है़ हवाई जहाज की शब्दावली में पीएनआर शब्द सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, पर हमारे आध्यात्मिक व नैतिक जीवन के लिए प्वाइंट ऑफ नो रिटर्न जैसी कोई अवधारणा नहीं है़ हम अपने जीवन में अच्छाई, धार्मिकता, ईश्वर की ओर जरूर वापस लौट सकते है़ं इसके लिए हमें अपने पापों पर नहीं, बल्कि ईश्वर की दया और क्षमा पर विश्वास करने करने की जरूरत है़
फादर अशोक कुजूर, डॉन बॉस्को यूथ एंड एजुकेशनल सर्विसेज बरियातू के निदेशक

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